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वाणिज्यिक विधि

नोवार्टिस एजी बनाम भारत संघ, (2013) 6 SCC 1

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 15-Dec-2023

परिचय:

  • यह मामला पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(d) का ऐतिहासिक मामला है।
  • यह मामला उस पेटेंट से संबंधित है जो उत्पाद को दिया जा सकता है यदि वह आविष्कार की नवीनता दर्शाता है।

तथ्य:

  • नोवार्टिस एजी (अपीलकर्ता) नामक एक बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी 'ग्लिवेक' या 'ग्लीवेक' नामक कैंसर की दवा के लिये एक पेटेंट पंजीकृत कराना चाहती थी, जिसे उन्होंने "इमैटिनिब मेसाइलेट" नामक पदार्थ के एक विशिष्ट रूप का उपयोग करके बनाया था।
  • सहायक नियंत्रक ने निर्धारित किया कि अपीलकर्ता के दावा किये गए आविष्कार का खुलासा ज़िम्मरमैन पेटेंट नामक एक समान उत्पाद के पूर्व प्रकरण में किया गया था।
  • पहले, अपीलकर्ता के अनुरोध को पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 5 नामक कानून के तहत अस्वीकार कर दिया गया था, जिसमें कहा गया था, "आविष्कार केवल पेटेंट योग्य निर्माण के तरीके या प्रक्रियाएँ थीं"।
  • बाद में जब वर्ष 2005 में कानून बदला गया, तो अपीलकर्ता ने पुनः प्रयास किया, लेकिन मद्रास पेटेंट कार्यालय और बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड ने इसे खारिज़ कर दिया।
  • उन्होंने कहा कि ग्लिवेक ने अमेरिका की 'ज़िम्मरमैन' नामक पुरानी दवा से बेहतर प्रभाव नहीं दिखाया।
  • इस वजह से यह पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3 (d) के तहत एक नए आविष्कार की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है।
  • इसलिये, कंपनी ने भारत के उच्चतम न्यायालय में अपील की।

शामिल मुद्दे:

  • क्या नोवार्टिस द्वारा दावा किया गया आविष्कार "इमैटिनिब मेसाइलेट का बीटा क्रिस्टलीय रूप" उस पदार्थ यानी "इमैटिनिब मेसाइलेट" की तुलना में अधिक प्रभावशाली है, जिससे इसे प्राप्त किया गया था?
  • पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(d) के संदर्भ में प्रभावकारिता का परीक्षण क्या है?

टिप्पणी:

  • न्यायालय ने कहा कि यह उत्पाद कोई नया पदार्थ नहीं है, यह केवल मौजूदा पदार्थ का एक अलग वर्ज़न है।
  • पेटेंट प्राप्त करने के लिये, इसे पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(d) के नियमों को पूरा करना होगा जो कहता है कि नए वर्ज़न को अपनी "ज्ञात प्रभावकारिता" में सुधार करना चाहिये।
    • उन्होंने "प्रभावकारिता" को चिकित्सीय प्रभावशीलता के रूप में समझाया।
  • तो ऐसे में कंपनी को यह साबित करना चाहिये था कि नया वर्ज़न पुराने वर्ज़न के मुकाबले बीमारियों के इलाज में बेहतर काम करता है। यहाँ "प्रभावकारिता" शब्द महत्त्वपूर्ण है।
  • उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धारा 3(d) का उद्देश्य "एवरग्रीनिंग" (Evergreening) पर अंकुश लगाना है, जहाँ कंपनियाँ छोटे बदलाव करके अपने पेटेंट का विस्तार करने का प्रयास करती हैं।
  • यदि कोई नया आविष्कार धारा 3(d) परीक्षण पास नहीं करता है, तो उसे पेटेंट नहीं मिल सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले का अर्थ यह नहीं है कि धारा 3(d) सभी छोटे सुधारों को रोकती है।

निष्कर्ष:

न्यायालय ने अंततः माना कि इमैटिनिब मेसाइलेट का बीटा क्रिस्टलीय रूप ज्ञात पदार्थ का नया रूप नहीं है और न्यायालय ने नोवार्टिस एजी की अपील को खारिज़ कर दिया।

नोट:

  • पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(d):
    • किसी ज्ञात पदार्थ के नए रूप की खोज मात्र जिसके परिणामस्वरूप उस पदार्थ की ज्ञात प्रभावकारिता में वृद्धि नहीं होती है या किसी नई संपत्ति की खोज या किसी ज्ञात पदार्थ के लिये नया उपयोग या किसी ज्ञात प्रक्रिया का मात्र उपयोग, मशीन या उपकरण जब तक कि ऐसी ज्ञात प्रक्रिया के परिणामस्वरूप कोई नया उत्पाद न निकले या कम-से-कम एक नया अभिकारक नियोजित न हो जाए।
    • स्पष्टीकरण: इस कार्य के प्रयोजनों के लिये, लवण, एस्टर, ईथर, पॉलीमोर्फ, मेटाबोलाइट्स, शुद्ध रूप, कण आकार, आइसोमर्स, आइसोमर्स के मिश्रण, कॉम्प्लेक्स, संयोजन और ज्ञात पदार्थ के अन्य डेरिवेटिव को एक ही पदार्थ माना जाएगा, जब तक वे प्रभावकारिता के संबंध में गुणों में महत्त्वपूर्ण रूप से भिन्न न हों।