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आपराधिक कानून
अनुसूचित अपराध के लिये प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होना धन शोधन निवारण अधिनियम के अधीन सिविल कार्यवाही के लिये पूर्व शर्त नहीं है
« »05-Jun-2026
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मेसर्स कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड और अन्य बनाम प्रवर्तन निदेशालय "अनुसूचित अपराध के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट का पंजीकरण न होना अथवा परिवाद दायर न किया जाना, प्रवर्तन निदेशालय (ED) को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत सिविल कार्यवाही प्रारंभ करने से वंचित नहीं करेगा। अनुसूचित अपराध का पंजीकरण केवल धारा 3 के अंतर्गत दण्डात्मक अभियोजन के लिये एक पूर्वापेक्षा है; यह धारा 5 के अंतर्गत कुर्की संबंधी सिविल कार्यवाही प्रारंभ करने अथवा धारा 15 के अंतर्गत जांच/अन्वेषण संबंधी शक्तियों के प्रयोग हेतु आवश्यक पूर्व-शर्त नहीं है।" न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार |
स्रोत: केरल उच्च न्यायालय
चर्चा में क्यों?
केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने मेसर्स कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड और अन्य बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2026) के मामले में यह निर्णय दिया कि प्रवर्तन निदेशालय अनुसूचित अपराध के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये बिना या परिवाद दर्ज किये बिना धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अधीन सिविल कार्यवाही शुरू कर सकता है।
- न्यायालय ने कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और उसके अधिकारियों द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज करने वाले एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी, और एकल न्यायाधीश के आदेश को पूर्णतः बरकरार रखा।
मेसर्स कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड और अन्य बनाम निदेशालय प्रवर्तन (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- 2023 में, कंपनी अधिनियम की धारा 210 और 212 के अधीन CMRLके मामलों की जांच की मांग करते हुए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के समक्ष एक परिवाद दर्ज की गई थी, जिसमें सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।
- यह आरोप लगाया गया था कि CMRL ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की पुत्री वीना थाइकंदियिल (वीना विजयन), उनकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और अन्य सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी और अवैध वित्तीय संव्यवहार किये।
- मंत्रालय ने जांच करने के लिये तीन निरीक्षकों को नियुक्त किया और , गंभीर धोखाधड़ी अन्वेषण कार्यालय (SFIO) को CMRL के मामलों का अन्वेषण करने का उत्तरदायित्त्व सौंपा।
- बाद में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से CMRL को पता चला कि SFIO के परिवाद के आधार पर एक्सालॉजिक के संबंध में शोधन निवारण अधिनियम के अधीन एक मामला दर्ज किया गया था।
- प्रवर्तन निदेशालय ने CMRL के पदाधिकारियों को समन जारी किया, जिन्होंने इस आधार पर पेश होने से इंकार कर दिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम की कार्यवाही उनके अधिकारिता में नहीं आती है।
- CMRL ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से संबंधित कार्यवाही को रद्द करने और अपने अधिकारियों के विरुद्ध जारी किये गए समन पर रोक लगाने के लिये केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
- एकल न्यायाधीश ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समन जारी करने के प्रक्रम में याचिका समय से पहले दायर की गई है और यह पाया कि अनुसूचित अपराधों के लिये प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना धन शोधन निवारण अधिनियम के अधीन समन जारी करने की पूर्व शर्त नहीं है। इसके बाद CMRL ने खंडपीठ के समक्ष अपील की।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
- प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) और प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रकृति के संबंध में: न्यायालय ने माना कि प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत एक सांविधिक दस्तावेज़ नहीं है और इसलिये यह दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट के समकक्ष नहीं है। चूँकि प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) में सांविधिक प्रकृति का अभाव है, इसलिये प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) का पंजीकरण न होना भी धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत सिविल कार्यवाही प्रारंभ करने में बाधक नहीं है, और परिणामस्वरूप, प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) को रद्द करने की कोई भी याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
- सिविल कार्यवाही के लिये पूर्व प्रथम सूचना रिपोर्ट की आवश्यकता के संबंध में: न्यायालय ने माना कि अनुसूचित अपराध के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट का पंजीकरण न होना या परिवाद दर्ज न होना, प्रवर्तन निदेशालय को धन शोधन निवारण अधिनियम के अधीन सिविल कार्यवाही प्रारंभ करने से नहीं रोकता है। अनुसूचित अपराध का पंजीकरण केवल धारा 3 के अधीन आपराधिक अभियोजन के लिये आवश्यक है, न कि धारा 5 के अधीन कुर्की की सिविल कार्यवाही या धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 15 के अधीन जांच शक्ति के प्रयोग के लिये।
- धारा 50 के अधीन जांच शक्ति के दायरे पर: न्यायालय ने माना कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 50 के अधीन प्रवर्तन निदेशालय की जांच शक्ति का प्रयोग अनुसूचित अपराध से संबंधित पूर्व प्रथम सूचना रिपोर्ट या परिवाद के बिना भी वैध रूप से किया जा सकता है, क्योंकि जांच शक्तियों के प्रयोग के लिये विधि द्वारा ऐसी कोई पूर्व शर्त अनिवार्य नहीं है।
- समन को समय से पहले चुनौती देने के संबंध में: न्यायालय ने एकल न्यायाधीश के इस निष्कर्ष की पुष्टि की कि इतने प्रारंभिक प्रक्रम में समन को चुनौती देना समय से पहले था, विशेष रूप से यह देखते हुए कि मामले की सुनवाई और आदेशों के लिये सुरक्षित रखे जाने के बाद गंभीर धोखाधड़ी अन्वेषण कार्यालय (SFIO) ने याचिकाकर्त्ताओं के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम के अधीन अनुसूचित अपराधों का आरोप लगाते हुए परिवाद दर्ज किया गया था।
- तदनुसार, खंडपीठ ने अपील को खारिज कर दिया और रिट याचिका को खारिज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा।
धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 क्या है?
बारे में:
- धन शोधन निवारण अधिनियम, जो 2005 में लागू हुआ, धन शोधन को रोकने और धन शोधन से प्राप्त या उसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने तथा उससे संबंधित या उससे जुड़े मामलों के लिये एक अधिनियम है।
प्रवर्तन अभिकरण:
- यह अधिनियम प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अन्वेषण करने, संपत्ति जब्त करने, संपत्ति की कुर्की करने और अपराधियों पर अभियोजन चलाने का अधिकार देता है।
दायरा:
- यह विधि धन शोधन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल व्यक्तियों, कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और मध्यस्थों पर लागू होता है।
धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रमुख प्रावधान :
- अपराध और दण्ड: धन शोधन से संबंधित अपराधों को परिभाषित करता है और कठोर कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान करता है। धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय हैं।
- कुर्की और ज़ब्ती: यह प्राधिकरण अधिकारियों को एक न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के माध्यम से अपराध की आय को कुर्क करने और ज़ब्त करने का अधिकार देता है।
- अपराध से प्राप्त आय: इसमें अनुसूचित अपराधों से संबंधित आपराधिक क्रियकलाप से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त कोई भी संपत्ति शामिल है, और इसमें समकक्ष संपत्ति भी शामिल है जब ऐसी आय देश से बाहर रखी जाती है या ले जाई जाती है।
- रिपोर्टिंग दायित्त्व: बैंकों और वित्तीय संस्थानों को रिकॉर्ड बनाए रखने और संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) को देने का आदेश देता है।
- संस्थागत ढाँचा : अन्वेषण की निगरानी और अपील पुनर्विलोकन सुनिश्चित करने के लिये एक नामित प्राधिकरण और एक अपीलीय अधिकरण का प्रावधान करता है।
न्यायिक घोषणाएँ:
- विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ (2022): उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी, कुर्की और अन्वेषण की शक्तियां भी शामिल हैं। न्यायालय ने निर्णय दिया कि अभियुक्त को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) की प्रति प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं है।
अरविंद केजरीवाल बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2024): उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19 के अधीन गिरफ्तारी के लिये "विश्वास करने का उचित कारण" की उच्च कसौटी को पूरा करना आवश्यक है, जो विधिक रूप से ग्राह्य सामग्री पर आधारित हो, न कि केवल संदेह पर।