होम / एडिटोरियल
आपराधिक कानून
भारतीय दंड संहिता के तहत हेट क्राइम
« »26-Dec-2023
स्रोत: मिंट
परिचय:
इन दिनों टी.वी. संवाद, सोशल मीडिया और अन्य सर्च साइटों के माध्यम से हेट क्राइम विकसित हो रहे हैं। ये जानकारी भारत के युवाओं तक इस तरह पहुँच रही है कि उनके मन में शत्रुता की भावना उत्पन्न हो सकती है। भारत में पहले से ही कई अपराधों से संबंधित कृत्यों को दंडित करने के लिये एक दंडात्मक कानून है जिससे हेट क्राइम को बढ़ावा मिल सकता है।
हेट क्राइम क्या हैं?
- हेट क्राइम व्यक्तियों या समूहों के खिलाफ उनके वर्ग, धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता, यौन उन्मुखीकरण, लैंगिक पहचान या अन्य संरक्षित विशेषताओं के कारण किये गए आपराधिक कृत्य हैं।
- ये अपराध किसी विशेष सामाजिक समूह में पीड़ित की कथित सदस्यता के प्रति पूर्वाग्रह, पक्षपात या घृणा से प्रेरित होते हैं।
हेट क्राइम के लिये भारत दंड संहिता, 1860 (IPC) में क्या धाराएँ हैं?
- धारा 153A:
- इसमें सद्भाव बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कृत्यों को शामिल किया गया है।
- IPC की धारा 153A उन कृत्यों से संबंधित है जो धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा और अन्य सहित विभिन्न आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता की भावना को बढ़ावा देते हैं।
- यह सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने वाली गतिविधियों में अपराध को शामिल करता है और दोषी पाए जाने वालों को कारावास का सामना करना पड़ सकता है।
- इस धारा के तहत तीन वर्ष तक के लिये कारावास या ज़ुर्माना या दोनों हो सकता है।
- धारा 153B:
- इसमें अभ्यारोपण से संबंधित कार्य जैसे राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले दावे शामिल हैं।
- इस धारा के तहत तीन वर्ष तक के लिये कारावास या ज़ुर्माना या दोनों हो सकता है।
- धारा 295A:
- यह धारा उन कार्यों को लक्षित करती है जिनका उद्देश्य जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।
- यह नागरिकों के किसी भी वर्ग की धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने या अपमान करने का प्रयास करने वाले कृत्यों से उत्पन्न होने वाली क्षति की संभावना को स्वीकार करता है।
- धारा 295A के तहत दोषी पाए गए व्यक्तियों को कारावास की सज़ा हो सकती है जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या ज़ुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 298:
- धारा 295A के समान, धारा 298 किसी भी व्यक्ति की ‘धार्मिक भावनाओं को आहत करने के जानबूझकर आशय’ शब्द से संबंधित है।
- इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे भाषण पर अंकुश लगाना है जिससे घृणा के साथ लोक व्यवस्था में असंतुलन हो सकता है।
- इस धारा के तहत कारावास एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या ज़ुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 505(2):
- धारा 505(2) उन बयानों पर केंद्रित है जो नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना उत्पन्न करते हैं या बढ़ावा देते हैं।
- इसमें लोक शांति को बाधित करने के आशय से दिये गए बयान शामिल हैं और इसके विधिक परिणाम हो सकते हैं।
- इस उपधारा के तहत कारावास तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या ज़ुर्माना या दोनों हो सकता है।
भारत में हेट क्राइम के बारे में तथ्य और आँकड़े क्या हैं?
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau- NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराधों में 1.2% की वृद्धि हुई, मामलों की संख्या वर्ष 2020 में 50,291 से बढ़कर वर्ष 2021 में 50,900 हो गई।
- हालाँकि वर्ष 2023 में इस रिपोर्ट से पता ज्ञात हुआ कि वर्ष 2022 में हेट क्राइम की रिपोर्टिंग में 45% की वृद्धि हुई है।
निष्कर्ष:
IPC में हेट क्राइम को रोकने और दंडित करने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के महत्त्व को पहचानने एवं कमज़ोर समूहों की रक्षा करने के उद्देश्य से प्रावधान शामिल हैं। हालाँकि हेट क्राइम की उभरती प्रकृति को संबोधित करने और यह सुनिश्चित करने के लिये निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है कि विधिक ढाँचे सभी नागरिकों के अधिकारों एवं सम्मान की सुरक्षा में प्रभावी रहें।