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आपराधिक कानून

अनुशासनात्मक प्राधिकारी नए कारण बताओ नोटिस के बिना कर्मचारी को दण्डित नहीं कर सकता

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 08-May-2026

डॉ. निगम प्रकाश नारायण बनाम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और अन्य 

"कार्यकारी समिति नए कारण बताओ नोटिस जारी किये बिना और/या डॉ. नारायण को विचाराधीन नए/वैकल्पिक आरोप का जवाब देने का उचित और तर्कसंगत अवसर दिये बिना दण्ड अधिरोपित नहीं कर सकते थे।" 

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा 

स्रोत: उच्चतम न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

उच्चतम न्यायालय की एक पीठ जिसमें न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा शामिल थेनेडॉ. निगम प्रकाश नारायण बनाम नेशनल मेडिकल कमीशन और अन्य (2026) के मामले मेंएक सेवानिवृत्त बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा दायर अपील को मंजूर कर लियाजिसे तीन महीने के लिये भारतीय मेडिकल रजिस्टर से प्रतिबंधित कर दिया गया था। 

  • न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि एक बार जब किसी दोषी कर्मचारी ने अपने विरुद्ध लगाए गए मूल आरोप से सफलतापूर्वक प्रतिरक्षा कर ली होतो अनुशासनात्मक प्राधिकारी नए कारण बताओ नोटिस के अभाव में उसे किसी अन्य या नए आरोप पर दण्डित नहीं कर सकता। ऐसा करना अनुशासनात्मक प्रक्रिया में एक गंभीर कमी है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। 

डॉ. निगम प्रकाश नारायण बनाम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और अन्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • अपीलकर्त्ताजो एक सेवानिवृत्त बाल रोग विशेषज्ञ हैंने पटना मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के निरीक्षण के दौरान एक संकाय घोषणा पत्र प्रस्तुत किया था। उन्होंने इस पत्र में यह प्रकटन नहीं किया कि वे पहले किसी अन्य संस्थान में संकाय सदस्य के रूप में कार्यरत थे। 
  • उन्हें फर्जी संकाय घोषणा पत्र जमा करने के आरोप में नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने नीतिशास्त्र समिति के समक्ष इस आरोप से सफलतापूर्वक प्रतिरक्षा की 
  • जब मामले को पुनर्विचार के लिये वापस भेजा गयातो नैतिकता समिति ने उन्हें लोप के एक कृत्य का दोषी पाया - यह आरोप फर्जी घोषणा प्रस्तुत करने के मूल आरोप से काफी भिन्न था। 
  • भारतीय चिकित्सा परिषद ने नैतिकता समिति के आदेश को बरकरार रखा। इससे असंतुष्ट होकर अपीलकर्त्ता ने पटना उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। 
  • एकल न्यायाधीश ने रिट याचिका को उनके पक्ष में मंजूर कर लियायद्यपिखंडपीठ ने एक अंतर-न्यायालय अपील में इस निर्णय को पलट दियाजिसके कारण अपीलकर्त्ता ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • नए आरोप पर दण्ड देने पर रोक:रवि ओरांव बनाम झारखंड राज्य (2025)के मामले पर विश्वास करते हुए, न्यायालय ने पुनः पुष्टि की कि एक बार जब कोई दोषी कर्मचारी सफलतापूर्वक अपने ऊपर लगे आरोप का बचाव कर लेता हैतो अनुशासनात्मक प्राधिकारीनए कारण बताओ नोटिस के अभाव मेंउसे किसी ऐसे पूर्णतः भिन्न आरोप पर दण्डित नहीं कर सकता जो मूल रूप से कभी लगाया ही नहीं गया था। आचार समिति द्वारा अपीलकर्त्ता को लोप के नए आरोप पर - बिना नया कारण बताओ नोटिस जारी किये – दण्डित करने का निर्णय गंभीर विधिक त्रुटि से ग्रस्त माना गया।   
  • प्रतिरक्षा का अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर:न्यायालय ने माना कि उचित और तर्कसंगत जवाब देने का अवसर प्राकृतिक न्याय का एक अनिवार्य नियम है। यदि कोई नया या वैकल्पिक आरोप विचाराधीन हैतो दोषी कर्मचारी को उस आरोप के विरुद्ध अपनी प्रतिरक्षा करने का अलग से अवसर दिया जाना चाहिये। इस प्रकार का अवसर दिये बिना दण्ड देना अग्राह्य हैचाहे मूल आचरण कितना भी गंभीर क्यों न हो। 
  • अपीलकर्त्ता के आचरण पर:प्रक्रियात्मक कमियों के होते हुए भीन्यायालय ने पाया कि अपीलकर्त्ता यह समझाने में विफल रहा कि प्रपत्र में गलत घोषणा क्यों की गई थी। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जानबूझकर की गई गलत घोषणा का स्पष्टीकरण न दे पाना स्वतः ही इसे कदाचार मानने का आधार बन जाता हैजिसे कार्यकारी समिति क्षमा नहीं कर सकती थी। 
  • अनुच्छेद 142 के अधीन शक्ति का प्रयोग:अपीलकर्त्ता की 76 वर्ष की उन्नत आयु को ध्यान में रखते हुएन्यायालय ने मूल दण्ड को बरकरार रखने से इंकार कर दिया। संविधान के अनुच्छेद 142 के अधीन अपनी अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग करते हुएन्यायालय ने दण्ड को तीन महीने के लिये भारतीय चिकित्सा रजिस्टर से नाम हटाने से घटाकर निंदा/चेतावनी जारी करने में बदल दिया। तदनुसारअपील को इन शर्तों पर मंजूर कर लिया गया। 

कारण बताओ नोटिस क्या होता है? 

  • कारण बताओ नोटिस एक औपचारिक संसूचना है जो किसी न्यायालयसरकारी अभिकरण या अन्य प्राधिकारी निकाय द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था को जारी किया जाता हैजिसमें उनसे उनके कार्योंनिर्णयों या व्यवहार को स्पष्ट करने या उचित ठहराने के लिये कहा जाता है।                                                     
  • कारण बताओ नोटिस का उद्देश्य प्राप्तकर्ता को विशिष्ट चिंताओं या कथित उल्लंघनों के संबंध में प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण प्रदान करने का अवसर देना है।