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बौद्धिक संपदा अधिकार

व्यापार चिह्न विधि में अंग्रेजी वर्णमाला का समावेश

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 20-Jan-2026

एल्केम लेबोरेटरीज लिमिटेड बनाम प्रीवेगो हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड 

'A TO Z' चिह्न वर्णनात्मक प्रकृति का है। इसलियेवादी को 'A' और 'Z' अक्षरों के उपयोग पर एकाधिकार की मांग करके इन अक्षरों के उपयोग पर एकाधिकार स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

न्यायमूर्ति तेजस कारिया 

स्रोत: दिल्ली उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने एल्केम लेबोरेटरीज लिमिटेड बनाम प्रीवेगो हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड (2025)के मामले मेंयह निर्णय दिया कि अंग्रेजी वर्णमाला को व्यापार चिह्न विधि के माध्यम से एकाधिकार नहीं किया जा सकता है और एक दवा कंपनी द्वारा प्रयोग किये गए ‘A TO Z’ चिह्न को अंतरिम संरक्षण देने से इंकार कर दिया। 

एल्केम लेबोरेटरीज लिमिटेड बनाम प्रीवेगो हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड (2025) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी 

  • मल्टीविटामिन उत्पादों की ब्रांडिंग में 'AZ' के प्रयोग को लेकर एल्केम लैबोरेटरीज ने प्रीवेगो हेल्थकेयर के विरुद्ध वाद दायर किया। 
  • एल्केम ने तर्क दिया कि प्रीवेगो का उत्पाद 'मल्टीवेन AZ' उसके सुप्रसिद्ध ‘A TO Z’ और 'A to Z-NS' ब्रांडों का उल्लंघन करता है।  
  • एल्केम ने दावा किया कि वह 1998 से ही फार्मास्युटिकल और स्वास्थ्य पूरक उत्पादों के लिये ‘A TO Z’ चिह्न का उपयोग कर रहा है। 
  • वादी ने आरोप लगाया कि प्रीवेगो द्वारा समान स्वास्थ्य पूरकों के लिये 'AZ' का उपयोग करनाउसके लोगो और ट्रेड ड्रेस में व्यापार चिह्न उल्लंघनपासिंग ऑफ और प्रतिलिप्यधिकार (कॉपीराइट) उल्लंघन के समान है।   
  • इससे पहले एल्केम लेबोरेटरीज के पक्ष में एकपक्षीय व्यादेश जारी किया गया था 
  • प्रीवेगो ने तर्क दिया कि ‘A TO Z’ एक सामान्य रूप से प्रयोग किया जाने वाला वाक्यांश है जो व्यापकता को दर्शाता है और इसमें विशिष्टता का अभाव है। 
  • प्रतिवादी ने तर्क दिया कि उसका चिह्न 'Multivein AZ' देखने मेंध्वनि में और अवधारणात्मक रूप से भिन्न थाजिसमें 'Multivein ' प्रमुख तत्त्व था। 
  • प्रीवेगो ने बताया कि एल्केम के पास ‘A TO Z’ शब्द के लिये वर्ग 5 में कोई वर्ड-मार्क रजिस्ट्रीकरण नहीं थाजिसमें फार्मास्युटिकल उत्पाद सम्मिलित हैं। 
  • इस मामले में मल्टीविटामिन और स्वास्थ्य पूरक श्रेणी के उत्पाद सम्मिलित थे। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • न्यायमूर्ति कारिया ने कहा, "अतः, 'A TO Z' चिह्न वर्णनात्मक प्रकृति का है।अतःवादी को 'A' और 'Z' अक्षरों के उपयोग पर एकाधिकार की मांग करके इन अक्षरों के उपयोग पर एकाधिकार स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" 
  • न्यायालय ने यह माना कि व्यापार चिह्न का मूल्यांकन समग्र रूप से किया जाना चाहियेन कि अलग-अलग घटकों में विभाजित करके।  
  • न्यायालय ने पाया कि ' Multivein' शब्द के जुड़ने से प्रतिवादी के चिह्न की समग्र छवि में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की संभावना काफी कम हो गई। 
  • न्यायालय ने एल्केम की इस बात के लिये आलोचना की कि उसने श्रेणी 5 में 'A TO Z' के व्यापार चिह्न के लिये पहले किये गए उन आवेदनों का प्रकटीकरण नहीं किया था जिन्हें वापस ले लिया गया थाछोड़ दिया गया था या जिनका विरोध किया गया था। 
  • न्यायालय ने निर्णय दिया कि इस प्रकार की जानकारी छिपाने के कारण एल्केम न्यायसंगत अनुतोष पाने का हकदार नहीं है। 
  • न्यायमूर्ति कारिया ने एल्केम के प्रतिलिप्यधिकार उल्लंघन के दावों को खारिज कर दिया।  
  • न्यायालय ने एल्केम के पक्ष में पहले जारी किये गए एकपक्षीय व्यादेश को रद्द कर दिया। 
  • न्यायालय ने प्रीवेगो को 'Multivein AZ' चिह्न के अधीन अपने उत्पाद की बिक्री जारी रखने की अनुमति दी। 
  • निर्णय में इस बात पर बल दिया गया किव्यापार चिह्न विधि के माध्यम से अंग्रेजी वर्णमाला पर एकाधिकार नहीं किया जा सकता है। 

भारत में व्यापार चिह्न विधि क्या है? 

व्यापार चिह्न के बारे में: 

  • व्यापार चिह्न एक प्रतीकशब्दवाक्यांशडिज़ाइन या इन तत्त्वों का संयोजन है जिसका उपयोग एक कंपनी के सामान या सेवाओं को दूसरी कंपनी के सामान या सेवाओं से पहचानने और अलग करने के लिये किया जाता है। 
  • व्यापार चिह्न बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) द्वारा संरक्षित होते हैं। 
  • भारत में व्यापार चिह्न विधि व्यापार चिह्न  अधिनियम, 1999 द्वारा शासित हैजो व्यापार और वाणिज्य में उपयोग किये जाने वाले विशिष्ट चिह्नों की रक्षा करता है। 
  • एक व्यापार चिह्न में शब्दलोगोप्रतीकरंग या इनका संयोजन शामिल हो सकता है जो एक यूनिट के सामान या सेवाओं को दूसरी यूनिट से अलग करता है। 
  • व्यापार चिह्न को सरकारी अभिकरणों के पास रजिस्ट्रीकृत कराया जा सकता है जिससे दूसरों द्वारा अनधिकृत उपयोग से विधिक संरक्षण प्रदान किया जा सके। 
  • किसी चिह्न के पंजीकरण योग्य होने के लियेउसमें विशिष्टता होनी चाहिये और वह वर्णनात्मकसामान्य या सामान्यत: उपयोग में आने वाला नहीं होना चाहिये 
  • व्यापार चिह्न वर्गीकरण का श्रेणी 5 फार्मास्युटिकल उत्पादोंऔषधीय तैयारियों और स्वास्थ्य पूरकों की बात करता है। 
  • वर्णनात्मक प्रकृति वाले चिह्नों में सामान्यत: व्यापार चिह्न संरक्षण के लिये आवश्यक विशिष्टता का अभाव होता है। 
  • सामान्य वाक्यांश या वर्णमाला संयोजन जो व्यापकता को दर्शाते हैंसामान्यत: अनन्य व्यापार चिह्न संरक्षण के लिये पात्र नहीं होते हैं। 

विधायी ढाँचा: 

  • भारत में व्यापार चिह्न से संबंधित विधि में संशोधन और उसे समेकित करने के लिये व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 को अधिनियमित किया गया और 30 दिसंबर 1999 को लागू किया गया। 
  • इस अधिनियम का घोषित उद्देश्य है: " व्यापार चिह्न से संबंधित विधि में संशोधन और उसे समेकित करनेवस्तुओं और सेवाओं के लिये व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण और बेहतर संरक्षण और कपटपूर्ण चिह्नों के प्रयोग का निवारण करने का उपबंध करने के लिये एक अधिनियम।" 
  • इस अधिनियम में 13 अध्याय हैं जिनमें कुल 159 धाराएँ सम्मिलित हैंजो व्यापार चिह्न अधिकारों के रजिस्ट्रीकरणसंरक्षण और प्रवर्तन को नियंत्रित करने वाले ढाँचे को परिभाषित करती हैं। 
  • यह अधिनियम व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का उपबंध करता है और उल्लंघन के लिये शास्ति की प्रणाली स्थापित करता है। 

व्यापार चिह्न रजिस्ट्री: 

  • व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की स्थापना मूल रूप से 1940 में हुई थी। 
  • वर्तमान मेंयह भारत सरकार के अधिकार के अधीनव्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 और उसके अंतर्गत बनाए गए संबंधित नियमों के प्रावधानों के अधीन संचालित होता है। 
  • रजिस्ट्री का क्षेत्रीय अधिकारिता भारत के संपूर्ण भूभाग में फैली हुई है। 
  • रजिस्ट्री का मुख्य कार्यालय मुंबई में स्थित हैजबकि इसके क्षेत्रीय शाखा कार्यालय अहमदाबादचेन्नईदिल्ली और कोलकाता में स्थित हैं। 
  • रजिस्ट्री को वस्तुओं और सेवाओं के लिये व्यापार चिह्न से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रशासन का दायित्त्व सौंपा गया हैजिसका उद्देश्य उल्लंघन और कपटपूर्ण उपयोग के विरुद्ध मजबूत संरक्षण सुनिश्चित करना है।  
  • भारत द्वारा मैड्रिड प्रोटोकॉल में सम्मिलित होने के पश्चात्—जो कि मैड्रिड प्रणाली के अधीन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है और व्यापार चिह्न के वैश्विक रजिस्ट्रीकरण को नियंत्रित करती है— व्यापार चिह्न रजिस्ट्री दोहरी भूमिका में कार्य करती है: भारतीय स्वामियों द्वारा दायर अंतरराष्ट्रीय आवेदनों के लिये मूल कार्यालय के रूप मेंऔर उन आवेदनों के लिये नामित कार्यालय के रूप में जिनमें भारत को संरक्षण चाहने वाले देश के रूप में पहचाना गया है।  
  • व्यापार चिह्न रजिस्ट्री का संचालन पेटेंटडिजाइन और व्यापार चिह्न के कंट्रोलर जनरल के नेतृत्व में होता हैजो व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रार के रूप में पदेन कार्य करते हैं। 

व्यापार चिह्न उल्लंघन और पासिंग ऑफ : 

  • व्यापार चिह्न का उल्लंघन तब होता है जब कोई अनाधिकृत पक्ष स्वामी की अनुमति के बिना किसी ऐसे चिह्न का उपयोग करता है जो रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के समान या भ्रामक रूप से मिलता-जुलता हो।  
  • उल्लंघन के परिणामस्वरूप विधिक कार्यवाही हो सकती हैजिसमें क्षतिपूर्तिव्यादेश और आपराधिक दण्ड सम्मिलित हैं। 
  • पासिंग ऑफ एक सामान्य विधिक उपचार है जो अपंजीकृत चिह्नों की रक्षा करता है जहाँ एक पक्षकार अपने माल या सेवाओं को दूसरे के माल या सेवाओं के रूप में मिथ्या रूप से प्रस्तुत करता है।  
  • पासिंग ऑफ के सफल दावे के लियेवादी को सद्भावनादुर्व्यपदेशन और नुकसान या नुकसान की संभावना को साबित करना होगा। 
  • भ्रम की संभावना का निर्धारण करते समय न्यायालय चिह्नों का समग्र रूप से मूल्यांकन करते हैंन कि उन्हें पृथक्-पृथक् घटकों में विभाजित करके। 
  • चिह्नों के बीच संभावित भ्रम का मूल्यांकन करते समय दृश्यध्वन्यात्मक और वैचारिक समानताओं पर विचार किया जाता है। 
  • किसी संयुक्त चिह्न का प्रमुख तत्त्व समग्र प्रभाव और विशिष्टता को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

रखरखाव संबंधी आवश्यकताएँ: 

  • किसी व्यापार चिह्न के विधिक संरक्षण को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उसका नियमित एवं वास्तविक उपयोग उन माल या सेवाओं के संदर्भ में किया जाएजिनके लिए वह रजिस्ट्रीकृत है 
  • यदि कोई व्यापार चिह्न लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाया जातातो वह निरस्तीकरण अथवा अवैध/अप्रभावी घोषित किया जा सकता है।