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सिविल कानून

वार्षिक आम बैठक

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 15-Apr-2026

परिचय 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 96 में यह अनिवार्य है कि एक व्यक्ति कंपनी (OPC) के अतिरिक्त प्रत्येक कंपनी को प्रत्येक वर्ष एक आम बैठक आयोजित करनी होगी जिसे उसकी वार्षिक आम बैठक (AGM) के रूप में नामित किया जाएगा। 

  • वार्षिक आम बैठक (AGM) वह मुख्य मंच है जिसके माध्यम से अंशधारक प्रबंधन के साथ बातचीत करते हैंखातों को मंजूरी देते हैंलाभांश की घोषणा करते हैंलेखा परीक्षकों और निदेशकों की नियुक्ति करते हैं और कंपनी के मामलों पर सामूहिक शासन का प्रयोग करते हैं।  
  • प्रत्येक वार्षिक आम बैठक (AGM) का आयोजन कार्यालय समय के दौरानअर्थात् सुबह बजे से शाम बजे के बीचराष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर किसी भी दिन किया जाना चाहिये। विशेष रूप सेवार्षिक आम बैठक (AGM) का आयोजन रविवार या सार्वजनिक अवकाश के दिन भी किया जा सकता हैबशर्ते उस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित न किया गया हो।   

आम बैठक के लिये सूचना की आवश्यकता (धारा 101 और 102) 

  • आम बैठक बुलाने के लिये कम से कम इक्कीस स्पष्ट दिनों का नोटिस लिखित रूप में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया जा सकता है। 
  • "स्पष्ट" शब्द के प्रयोग का अर्थ है कि नोटिस की तामील का दिन और बैठक का दिन दोनों में से किसी को भी नहीं गिना जाएगा। 
  • यद्यपियदि बैठक में मतदान करने के हकदार सदस्यों में से कम से कम पंचानवे प्रतिशत (95%) सदस्यों से लिखित रूप में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सहमति प्राप्त हो जाती हैतो कम समय के पूर्व सूचना पर भी बैठक बुलाई जा सकती है। 
  • प्रत्येक बैठक की सूचना कंपनी के प्रत्येक निदेशक और लेखा परीक्षकों को दी जानी चाहिये 
  • जहाँ कोई विशेष व्यवसाय किया जाना होवहाँ नोटिस के साथ संलग्न विवरण में प्रत्येक निदेशकप्रबंधकप्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (KMP) और उनके रिश्तेदारों के ऐसे व्यवसाय से संबंधित वित्तीय या अन्य प्रकार के हितों या चिंताओं की प्रकृति का प्रकटन करना आवश्यक है। 

आम बैठकों के लिये कोरम (धारा 103) 

  • कोरम से तात्पर्य बैठक के वैध रूप से गठित होने के लिये व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले सदस्यों की न्यूनतम संख्या से है। 
  • किसी सार्वजनिक कंपनी के लियेबैठक की तारीख को उपस्थित सदस्यों की कुल संख्या के आधार पर कोरम निर्धारित किया जाता है: 
  • जहाँ कुल सदस्यता एक हजार से अधिक न होवहाँ पाँच सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने चाहिये 
  • जहाँ कुल सदस्यता एक हजार से अधिक लेकिन पाँच हजार से अधिक नहीं हैवहाँ पंद्रह सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने चाहिये 
  • तीस सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थेजबकि कुल सदस्यता पाँच हजार से अधिक है। 
  • किसी कंपनी के नियमों मेंविधि द्वारा निर्धारित कोरम से अधिक कोरम का प्रावधान हो सकता है। निजी कंपनी के मामले मेंकिसी भी बैठक के लिये व्यक्तिगत रूप से उपस्थित दो सदस्य कोरम का गठन करेंगे। 
  • यदि कोई बैठक स्थगित की जाती है या दिनसमय या स्थान में कोई परिवर्तन होता हैतो कंपनी को सदस्यों को कम से कम तीन दिन पहले सूचना देनी होगीया तो व्यक्तिगत रूप से या रजिस्ट्रीकृत कार्यालय के स्थान पर प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र में विज्ञापन के माध्यम से। 

अध्यक्ष के रूप में कौन अध्यक्षता करता है? 

  • धारा 104 के अधीनकंपनी के आर्टिकल्स में यह उपबंध हो सकता है कि बोर्ड का अध्यक्ष प्रत्येक आम बैठक में अध्यक्ष के रूप में अध्यक्षता करेगा। 
  • यदि नियमों में इस बिंदु पर कोई उल्लेख नहीं हैतो बैठक में उपस्थित सदस्य अपने में से किसी एक को अध्यक्ष के रूप में चुनेंगे। 

प्रतिनिधि नियम (Proxy Rules) 

  • धारा 105 प्रतिनिधियों की नियुक्ति को नियंत्रित करती है। 
  • कंपनी में उपस्थित होने और मतदान करने के लिये अधिकृत कोई भी सदस्य किसी अन्य व्यक्ति को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करने का हकदार है। यद्यपिप्रतिनिधि नियुक्त करने पर कुछ महत्त्वपूर्ण प्रतिबंध लागू होते हैं: 
  • एक प्रतिनिधि पचास से अधिक सदस्यों की ओर से कार्य नहीं करेगाऔर मतदान अधिकार रखने वाली कंपनी की कुल शेयर पूँजी के दस प्रतिशत से अधिक अंश नहीं रखेगा। 
  • इसके अतिरिक्तधर्मार्थ प्रयोजनों के लिये रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी का कोई सदस्य किसी अन्य व्यक्ति को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त नहीं कर सकता हैजब तक कि वह अन्य व्यक्ति भी उसी कंपनी का सदस्य न हो।  

निष्कर्ष 

कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत वार्षिक आम बैठकों को नियंत्रित करने वाला सांविधिक ढाँचा कंपनी प्रशासन में अंशधारकों की संरचित भागीदारी सुनिश्चित करता है। पर्याप्त सूचनानिर्धारित कोरम और विनियमित प्रतिनिधि नियुक्ति की आवश्यकताएं सामूहिक रूप से कंपनी की बैठकों के लोकतांत्रिक स्वरूप की रक्षा करती हैं और सभी वर्गों के सदस्यों के हितों की सुरक्षा करती हैं।