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आपराधिक कानून

मुवक्किल के निर्देशों पर अधिवक्ता द्वारा दिये गए कथन मानहानि के रूप में अभियोजनीय नहीं होते

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 09-Apr-2026

"किसी भी अधिवक्ता पर मुवक्किल द्वारा दिये गए निर्देशों के आधार पर दिये गए किसी भी कथन के लिये मानहानि का वाद नहीं लाया जा सकता। उन निर्देशों पर अमल करने से उत्पन्न होने वाला कोई भी उत्तरदायित्व मुवक्किल का होगान कि अधिवक्ता का ।" 

न्यायमूर्ति जी.के. इलन्थिरैयन 

स्रोत: मद्रास उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.के. इलन्थिरैयन नेजे.एन. नरेश कुमार बनाम जयकरण वासुदेवन और अन्य (2026)के मामले में एक अधिवक्ता के विरुद्ध प्रारंभ की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द कर दिया। 

  • न्यायालय ने अवधारित किया कि एक अधिवक्ता जो केवल अपने मुवक्किल के निर्देशों के आधार पर कथन देता हैउसे मानहानि के लिये उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता हैऔर कोई भी विपरीत दृष्टिकोण अधिवक्ताओं के विशेषाधिकार पर स्थापित विधि के विरुद्ध होगा। 

जे.एन. नरेश कुमार बनाम जयकरण वासुदेवन और अन्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • यह मामला वैवाहिक विवाद से उत्पन्न हुआ है जिसमें एक पति ने अपने विवाह को अमान्य घोषित करने के लिये दीवानी वाद दायर किया था। 
  • अपने दीवानी वादों के जवाब में की गई कार्रवाई का आरोप लगाते हुएपति ने तिरुवल्लूर के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक निजी परिवाद दर्ज करायाजिसमें उसने आरोप लगाया: 
  • उनकी पत्नी ने अपनी नाबालिग पुत्री का इस्तेमाल करते हुए लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के अधीन मिथ्या परिवाद दर्ज कराया 
  • पत्नी के अधिवक्ता (याचिकाकर्ता) पर पत्नी को लैंगिक उत्पीड़न के मिथ्या आरोप फैलाने में सक्रिय रूप से सहायता करने और दुष्प्रेरण का आरोप है। 
  • पति ने आरोप लगाया कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में परिवाद दर्ज होने से पहले ही प्रमुख समाचार पत्रों में मिथ्या आरोप प्रकाशित किये गए थे। 
  • तिरुवल्लूर की महिला न्यायालय ने जांच के बाद लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के परिवाद को खारिज कर दिया। 
  • मजिस्ट्रेट ने मानहानि के परिवाद को अभिलेख में दर्ज कर लिया। 
  • पत्नी और अधिवक्ता दोनों ने अलग-अलग मद्रास उच्च न्यायालय में मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने की अपील की। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियाँ थीं? 

न्यायालय ने निम्नलिखित प्रमुख टिप्पणियाँ कीं: 

  • अधिवक्ता की भूमिका का स्वरूप: 
  • अधिवक्ता वह प्रतिनिधि होता है जो दूसरे व्यक्ति की ओर से बोलता है। 
  • मुवक्किल द्वारा दिये गए निर्देशों के अलावाएक अधिवक्ता के पास बताई गई बातों की सत्यता या असत्यता को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने का कोई अवसर नहीं होता है। 
  • उत्तरदायित्व मुवक्किल का है: 
  • अधिवक्ता का कर्तव्य केवल यह तय करना है कि क्या वह दिये गए निर्देशों पर उचित रूप से कार्य कर सकता है। 
  • ऐसे निर्देशों पर अमल करने से जो भी उत्तरदायित्व उत्पन्न होता हैवह मुवक्किल का होता हैअधिवक्ता का नहीं। 
  • अधिवक्ताओं का विशेषाधिकार — स्थापित विधि: 
  • मुवक्किल के निर्देश पर कथन देने के लिये किसी अधिवक्ता को मानहानि का दोषी ठहरानाअधिवक्ताओं को प्रदत्त विशेषाधिकार के दायरे और सीमा को परिभाषित करने वाले न्यायिक निर्णयों की स्थापित प्रवृत्ति के विपरीत होगा। 
  • प्रक्रिया का दुरुपयोग: 
  • न्यायालय ने मानहानि के परिवाद में अधिवक्ता को अभियुक्त के रूप में फंसाए जाने को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया। 
  • अधिवक्ता के विरुद्ध दर्ज परिवाद को विधि की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग माना गया। 
  • पत्नी को अनुतोष देने से इंकार: 
  • पत्नी के विरुद्ध मानहानि के मामले के संबंध मेंन्यायालय ने गौर किया कि उसके विरुद्ध विशिष्ट आरोप लगाए गए थे। 
  • याचिका को रद्द करने का कोई आधार न पाते हुएन्यायालय ने उसकी याचिका खारिज कर दी और निचले न्यायालय को महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया। 

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 क्या है? 

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 - मानहानि 

परिभाषा: 

  • किसी व्यक्ति के बारे में कोई भी लांछन लगाना/प्रकाशित करना (मौखिकलिखितसंकेत या दृश्य प्रस्तुतिकरण के माध्यम से) जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता हो या नुकसान पहुंचाने का आशय रखता हो। 

मुख्य स्पष्टीकरण: 

  • यदि यह बात मृतक व्यक्तियों के परिवार को दुख पहुँचाती हैतो यह नियम उन पर भी लागू होता है। 
  • यह कंपनियों/संगमों पर भी लागू होता है। 
  • व्यंग्यात्मक या वैकल्पिक कथनों को भी गिना जा सकता है। 
  • हानि का अर्थ है नैतिक/बौद्धिक चरित्रजातिपेशेसाख को कम करना या किसी घृणित शारीरिक स्थिति का संकेत देना। 

अपवाद (मानहानि नहीं है यदि …): 

  • जनहित के लिये सत्य प्रकाशित किया गया। 
  • किसी लोक सेवक के सार्वजनिक आचरण पर सद्भावनापूर्ण राय। 
  • किसी सार्वजनिक मुद्दे पर किसी व्यक्ति के आचरण के संबंध में सद्भावनापूर्ण राय। 
  • न्यायालय की कार्यवाही की काफी हद तक सही रिपोर्टें। 
  • किसी न्यायालय के मामले के फैसले के गुण-दोष पर सद्भावनापूर्ण राय। 
  • सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत प्रदर्शन/कार्य पर सद्भावनापूर्ण राय। 
  • किसी वैध प्राधिकारी (न्यायाधीशनियोक्ताअभिभावकशिक्षक) द्वारा सद्भावनापूर्वक निंदा करना। 
  • किसी व्यक्ति के विधिक वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष सद्भावनापूर्वक लगाया गया लांछन 
  • अपने या दूसरे के हितों की रक्षा के लिये सद्भावनापूर्वक लांछन लगाना। 
  • प्राप्तकर्ता या जनता के हित में सद्भावनापूर्वक दी गई चेतावनी। 

दण्ड: 

  • किसी दूसरे व्यक्ति की मानहानि करना  2 वर्षतक का साधारण कारावासजुर्मानाया दोनोंया सामुदायिक सेवा। 
  • मानहानिकारक सामग्री छापना/उत्कीर्णन करना  2 वर्षतक का कारावासजुर्माना या दोनों। 
  • मानहानिकारक मुद्रित सामग्री बेचना  2 वर्षतक का कारावासजुर्माना या दोनों।