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सिविल कानून

कंपनी बनाम सीमित देयता भागीदारी

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 17-Apr-2026

परिचय 

कंपनी और सीमित देयता भागीदारी (LLP) दोनों ही विधि द्वारा स्थापित पृथक् विधिक संस्थाएँ हैंजिनका अस्तित्व शाश्वत होता है और वे अपने नाम से वाद कर सकती हैं और उनके विरुद्ध वाद किया जा सकता है। यद्यपिवे भिन्न विधियों - कंपनी अधिनियम, 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 - द्वारा शासित होती हैं और उनकी संरचनात्मक रूपरेखाअनुपालन आवश्यकताएँ और आंतरिक शासन व्यवस्था काफी भिन्न होती हैं। 

कंपनी और सीमित देयता भागीदारी (LLP) के बीच अंतर 

मापदंड 

कंपनी 

सीमित देयता भागीदारी (LLP)  

शासकीय विधि 

कंपनी अधिनियम, 2013 

सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008  

चार्टर दस्तावेज़ 

कंपनी का ज्ञापन (MOA) 

सीमित देयता भागीदारी करार 

सामान्य मुहर 

अनिवार्यप्रत्येक कंपनी के लिये आवश्यक 

वैकल्पिकसीमित देयता भागीदारी करार पर निर्भर 

सदस्यों/भागीदारों की संख्या 

प्राइवेट: 2–50; सार्वजनिक: न्यूनतम 7 

न्यूनतम 2; अधिकतम सीमा नहीं 

देयता 

शेयरों पर अवैतनिक राशि तक सीमित 

साशय किये गए कपट या सदोष कृत्यों के मामलों को छोड़करयह केवल पूँजी योगदान तक सीमित है 

हितों का अंतरण 

स्वतंत्र रूप से अंतरणीय 

सीमित देयता भागीदारी करार द्वारा विनियमित 

सांविधिक बैठकें 

निदेशक मंडल बैठक एवं साधारण बैठक अनिवार्य 

बैठकों का कोई सांविधिक दायित्त्व नहीं 

कार्यवृत्त (Minutes)  

कार्यवाही का अभिलेखन अनिवार्य 

वैकल्पिकयदि सीमित देयता भागीदारी करार में प्रावधान हो 

वार्षिक फाइलिंग 

वार्षिक वित्तीय विवरण एवं वार्षिक प्रतिवेदन ROC में दाखिल 

लेखा विवरणसॉल्वेंसी विवरण एवं वार्षिक प्रतिवेदन रजिस्ट्रार के समक्ष दाखिल  

लेखापरीक्षण (Audit)  

कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत अनिवार्य 

केवल तब अनिवार्य जब टर्नओवर ₹40 लाख से अधिक या योगदान ₹25 लाख से अधिक हो  

लेखांकन मानक 

अनुपालन अनिवार्य  

नियम अभी अधिसूचित नहींअनिवार्य रूप से लागू नहीं  

पहचान संख्या 

निदेशकों को निदेशक पहचान संख्या (DIN) की आवश्यकता होती है  

नामित भागीदारों को नामित भागीदार पहचान संख्या (DPIN) की आवश्यकता होती है   

प्रबंधकीय कर्मियों को पारिश्रमिक 

कंपनी अधिनियम के अंतर्गत विधिक प्रतिबंध लागू 

सीमित देयता भागीदारी करार के अनुसारकोई सांविधिक सीमा नहीं 

निदेशकों/भागीदारों के साथ संविदा 

कुछ विनिर्दिष्ट संविदाओं पर प्रतिबंध लागू होते हैंजिनमें निदेशक हितबद्ध होते हैं 

भागीदार ऐसी किसी भी पाबंदी के बिना कोई भी संविदा करने के लिये स्वतंत्र हैं 

उत्पीड़न एवं कुप्रबंधन 

कंपनी अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक उपचार उपलब्ध 

सीमित देयता भागीदारी अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं  

व्हिसल ब्लोइंग (Whistle Blowing) 

कंपनी अधिनियम, 2013 में कोई प्रावधान नहीं 

अन्वेषण के दौरान सूचना देने वाले कर्मचारियों/भागीदारों को संरक्षण 

साख (Creditworthiness) 

उच्चतमकठोर अनुपालन एवं प्रकटीकरण के कारण 

भागीदारी की तुलना में अधिकलेकिन कंपनी की तुलना में कम 

विलय/एकत्रीकरण 

समझौताव्यवस्थाविलय या समामेलन कर सकते हैं  

समझौताव्यवस्थाविलय या समामेलन कर सकते हैं   

निष्कर्ष 

तथापि कंपनी और सीमित देयता भागीदारी (LLP) दोनों ही पृथक् विधिक पहचान और सीमित देयता के दोहरे लाभ प्रदान करते हैंलेकिन वे भिन्न संगठनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। एक कंपनीअपने कठोर सांविधिक ढाँचेअनिवार्य लेखापरीक्षाओं और संरचित शासन के साथउच्च साख और सार्वजनिक भागीदारी की आवश्यकता वाले बड़े उद्यमों के लिये उपयुक्त है। इसके विपरीतसीमित देयता भागीदारी अधिक परिचालन लचीलापन और कम अनुपालन भार प्रदान करता हैजिससे यह पेशेवर सेवाओं और छोटे उद्यमों के लिये बेहतर विकल्प बन जाता है।