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सिविल कानून

कंपनी विधि के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ – भाग 1

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 17-Apr-2026

परिचय 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा में परिभाषात्मक ढाँचा दिया गया हैजिस पर संपूर्ण अधिनियम आधारित है। इन परिभाषाओं की स्पष्ट समझ न केवल अधिनियम के प्रावधानों के निर्वचन के लिये अपितु कॉर्पोरेट प्रशासनदायित्त्व और नियामक अनुपालन से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिये भी अपरिहार्य है। 

  • ये परिभाषाएँ यह निर्धारित करती हैं कि संस्थाओं को कैसे वर्गीकृत किया जाता हैकंपनियों के बीच संबंध कैसे स्थापित किये जाते हैं और विधि में पूंजी संरचनाओं को कैसे समझा जाता है।  

परिभाषाओं का संक्षिप्त विवरण 

धारा 

पद 

                   परिभाषा  

2(1) 

संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस 

ऐसा ज्ञापन जिसमें प्रॉस्पेक्टस की वे मुख्य विशेषताएँ सम्मिलित होंजिन्हें SEBI द्वारा विनियम बनाकर निर्दिष्ट किया जाए।  

2(2) 

लेखा मानक 

कंपनियों या कंपनियों के वर्ग हेतु धारा 133 में निर्दिष्ट लेखांकन मानक अथवा उनके परिशिष्ट।  

2(3) 

परिवर्तन / बदलाव 

इसमें जोड़विलोपन तथा प्रतिस्थापन करना सम्मिलित है।  

2(4) 

अपीलीय अधिकरण 

धारा 410 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण।  

2(5) 

आर्टिकल्स 

किसी कंपनी के संघ के आर्टिकल्सजैसा कि मूल रूप से तैयार किया गया हो या समय-समय पर संशोधित किया गया हो या किसी पूर्व कंपनी विधि या इस अधिनियम के अनुसरण में लागू किया गया हो।  

2(6) 

सहयोगी कंपनी 

एक ऐसी कंपनी जिसमें किसी अन्य कंपनी का महत्त्वपूर्ण प्रभाव हो (करार के अधीन कम से कम 20% मतदान शक्ति या नियंत्रण) लेकिन जो उसकी सहायक कंपनी न होइसमें संयुक्त उद्यम कंपनी भी सम्मिलित है। 

2(7) 

लेखापरीक्षा मानक 

धारा 143 की उपधारा (10) में निर्दिष्ट कंपनियों या कंपनियों के वर्ग के लिये लेखापरीक्षा के मानक या उसमें कोई परिशिष्ट।  

2(8) 

अधिकृत / नाममात्रपूंजी 

किसी कंपनी के ज्ञापन द्वारा अधिकृत पूंजीउसकी शेयर पूंजी की अधिकतम राशि होती है। 

2(9) 

बैंकिंग कंपनी 

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा के खंड (ग) में परिभाषित बैंकिंग कंपनी। 

2(10) 

निदेशक मंडल / बोर्ड 

कंपनी के निदेशकों का सामूहिक निकाय। 

2(11) 

निगम निकाय / निगम 

इसमें भारत के बाहर निगमित कंपनी शामिल हैसहकारी समितियां और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किये जा सकने वाले अन्य निकाय इसमें शामिल नहीं हैं। 

2(12) 

पुस्तक और कागज / पुस्तक या कागज 

इसमें लेखा-पुस्तकोंदस्तावेज़ोंरसीदोंलेखोंदस्तावेज़ों कार्यवृत्तों और रजिस्टरों को शामिल किया गया हैजिन्हें कागज पर या इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है। 

2(13) 

लेखा-पुस्तकों 

धारा 148 के तहत निर्धारित अनुसार प्राप्त और व्यय किये गए धनबिक्री और खरीदपरिसंपत्तियों और देनदारियों तथा लागत मदों के संबंध में अभिलेख रखे जाते हैं।  

2(14) 

शाखाकार्यालय 

कंपनी द्वारा इस प्रकार वर्णित कोई भी प्रतिष्ठान।  

2(15) 

बुलाई गई पूंजी 

पूंजी का वह भाग जिसे भुगतान के लिये बुलाया गया है। 

2(16) 

चार्ज 

किसी कंपनी या उसके किसी उपक्रम की संपत्ति या परिसंपत्तियों पर सुरक्षा के रूप में बनाया गया कोई हित या ग्रहणाधिकारइसमें बंधक भी शामिल है।  

2(17) 

चार्टर्ड अकाउंटेंट 

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 के अधीन परिभाषित एक चार्टर्ड अकाउंटेंटजिसके पास वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट हो। 

2(18) 

मुख्य कार्यकारी अधिकारी 

कंपनी द्वारा नामित कोई अधिकारी। 

2(19) 

मुख्य वित्तीय अधिकारी 

किसी कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में नियुक्त व्यक्ति।  

2(20) 

कंपनी 

इस अधिनियम के अधीन या किसी पूर्व कंपनी विधि के अधीन निगमित कंपनी। 

2(21) 

गारंटी द्वारा सीमित कंपनी 

एक ऐसी कंपनी जिसके सदस्यों की देनदारी ज्ञापन द्वारा उस राशि तक सीमित होती हैजितनी राशि सदस्य कंपनी के समापन पर परिसंपत्तियों में योगदान करने का वचन देते हैं। 

2(22) 

शेयरों द्वारा सीमित कंपनी 

एक कंपनी जिसके सदस्यों की देनदारी ज्ञापन द्वारा उनके पास मौजूद शेयरों पर बकाया राशि तक सीमित है।  

2(23) 

कंपनी परिसमापक 

किसी कंपनी के परिसमापन के लिये धारा 275 के तहत न्यायाधिकरण द्वारा कंपनी परिसमापक के रूप में नियुक्त व्यक्ति। 

2(24) 

कंपनी सचिव / सचिव 

कंपनी सचिव अधिनियम, 1980 के अधीन परिभाषित कंपनी सचिवजिसे किसी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के अधीन सचिवीय कार्यों को करने के लिये नियुक्त किया जाता है। 

2(25) 

प्रैक्टिस में कंपनी सचिव 

कंपनी सचिव अधिनियम, 1980 की धारा की उपधारा (2) के अधीन व्यवहारमें माना जाने वाला कंपनी सचिव।  

2(26) 

अंशदायी 

कंपनी के परिसमापन की स्थिति मेंकंपनी की परिसंपत्तियों में योगदान देने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति। पूर्ण रूप से भुगतान किए गए शेयरों का धारक अंशदाता तो होता हैलेकिन उस पर कोई दायित्व नहीं होता।  

2(27) 

नियंत्रण 

इसमें निदेशकों के बहुमत की नियुक्ति करने या प्रबंधन या नीतिगत निर्णयों को नियंत्रित करने का अधिकार शामिल हैजिसका प्रयोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से - शेयरधारिताप्रबंधन अधिकारोंशेयरधारकों या मतदान समझौतोंया अन्यथा के माध्यम से किया जा सकता है। 

2(28) 

लागत लेखाकार 

लागत एवं कार्य लेखाकार अधिनियम, 1959 के अधीन परिभाषित लागत लेखाकारजिसके पास वैध अभ्यास प्रमाण पत्र हो 

2(29) 

न्यायालय 

इसमें कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर अधिकारिता रखने वाला उच्च न्यायालयकेंद्र सरकार द्वारा सशक्त किये गए जिला न्यायालयसेशन न्यायालयधारा 435 के अधीन विशेष न्यायालयऔर कोई भी महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट शामिल है। 

2(30) 

डिबेंचर  

इसमें कंपनी के डिबेंचर को प्रमाणित करने वाले डिबेंचर स्टॉकबॉन्ड या कोई अन्य साधन शामिल हैंचाहे वे परिसंपत्तियों पर प्रभार हों या न हों। इसमें भारतीय रिजर्व बैंकअधिनियम, 1934 के अध्याय III-D के अंतर्गत आने वाले साधन और ऐसे साधन शामिल नहीं हैं जिन्हें विहित किया जा सकता है। 

2(31) 

जमा 

इसमें किसी कंपनी द्वारा जमाऋण या किसी अन्य रूप में प्राप्त धन की कोई भी प्राप्ति शामिल हैइसमें भारतीय रिजर्व बैंकके परामर्श से निर्धारित की जाने वाली ऐसी श्रेणियां शामिल नहीं हैं। 

2(32) 

जमाकर्ता 

जमाकर्ता अधिनियम, 1996 की धारा की उपधारा (1) के खंड (ङ) के अधीन परिभाषित जमाकर्ता।  

2(33) 

व्युत्पन्न 

प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 की धारा के खंड (कग) में परिभाषित व्युत्पन्न। 

2(34) 

निदेशक 

किसी कंपनी के निदेशक मंडल में नियुक्त किया गया निदेशक।  

2(35) 

लाभांश 

इसमें अंतरिम लाभांश भी शामिल है।  

2(36) 

दस्तावेज़ 

इसमें समननोटिसमांग पत्रआदेशघोषणाप्रपत्र और रजिस्टर शामिल हैं - चाहे वे इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन जारी किये गए होंभेजे गए हों या रखे गए हों - जो कागज पर या इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए हों। 

2(37) 

कर्मचारी स्टॉक विकल्प 

किसी कंपनी या उसकी होल्डिंग या सहायक कंपनी के निदेशकोंअधिकारियों या कर्मचारियों को भविष्य में किसी पूर्व-निर्धारित मूल्य पर शेयर खरीदने या सदस्यता लेने का विकल्प दिया जाता है। 

2(38) 

विशेषज्ञ 

इसमें इंजीनियरमूल्यांकनकर्ताचार्टर्ड अकाउंटेंटकंपनी सचिवकॉस्ट अकाउंटेंट और कोई भी अन्य व्यक्ति शामिल है जिसके पास किसी भी प्रचलित विधि के अधीन प्रमाण पत्र जारी करने की शक्ति या अधिकार है। 

2(39) 

वित्तीय संस्था 

इसमें अनुसूचित बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अधीन परिभाषित या अधिसूचित कोई अन्य वित्तीय संस्था शामिल है।  

2(40) 

वित्तीय विवरण 

इसमें बैलेंस शीटलाभ-हानि खाता या आय-व्यय खातानकदी प्रवाह विवरणइक्विटी में परिवर्तन का विवरण (यदि लागू हो)और व्याख्यात्मक नोट्स शामिल हैं। OPC, लघु कंपनी और निष्क्रिय कंपनी के लिये नकदी प्रवाह विवरण आवश्यक नहीं है। 

2(41) 

वित्तीय वर्ष 

यह अवधि प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को समाप्त होती है। यदि निगमित कंपनियां जनवरी या उसके बाद स्थापित हुई हैंतो यह अवधि अगले वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होती है। केंद्र सरकार विदेशी कंपनियों की होल्डिंग/सहायक/संबद्ध कंपनियों के लिये अलग अवधि निर्धारित कर सकती है। 

2(42) 

विदेशी कंपनी 

भारत के बाहर निगमित कोई भी कंपनी या निगमित निकाय जिसका भारत में (भौतिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) व्यवसायिक स्थान है और जो भारत में किसी भी अन्य तरीके से कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित करता है।  

2(43) 

मुक्त भंडार 

नवीनतम लेखापरीक्षित बैलेंस शीट के अनुसार लाभांश के रूप में वितरण के लिये उपलब्ध भंडार। इसमें अवास्तविक लाभकाल्पनिक लाभपरिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन और इक्विटी में मान्यता प्राप्त परिसंपत्तियों या देनदारियों के वहन मूल्य में परिवर्तन शामिल नहीं हैं। 

2(44) 

ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट  

भारत के बाहर स्थित किसी विदेशी डिपॉजिटरी द्वारा निर्मित और ऐसी रसीदें जारी करने वाली कंपनी द्वारा अधिकृत डिपॉजिटरी रसीद के रूप में कोई भी दस्तावेज़ 

2(45) 

सरकारी कंपनी  

ऐसी कंपनी जिसमें कम से कम 51% चुकता शेयर पूंजी केंद्र सरकारकिसी राज्य सरकार या दोनों के पास हो। इसमें ऐसी कंपनी की सहायक कंपनी भी शामिल है।  

2(46) 

होल्डिंग कंपनी 

एक ऐसी कंपनी जिसकी एक या एक से अधिक अन्य कंपनियां सहायक कंपनियां हैं। इस प्रयोजन के लिये "कंपनी" शब्द में कोई भी निगमित निकाय शामिल है। 

2(47) 

स्वतंत्र निदेशक 

धारा 149 की उपधारा (6) में निर्दिष्ट स्वतंत्र निदेशक।  

2(48) 

भारतीय डिपॉजिटरी रसीद  

भारत में स्थित किसी घरेलू डिपॉजिटरी द्वारा निर्मित और भारत के बाहर निगमित किसी कंपनी द्वारा अधिकृत डिपॉजिटरी रसीद के रूप में कोई भी दस्तावेज़ 

2(50) 

जारी की गई पूंजी  

कंपनी समय-समय पर सदस्यता के लिये जो पूंजी जारी करती है।  

निष्कर्ष 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा के अंतर्गत दी गई परिभाषाएँ मात्र तकनीकी औपचारिकताएँ नहीं हैं — वे कॉर्पोरेट विधि की संपूर्ण व्याख्यात्मक नींव निर्धारित करती हैं। इन परिभाषाओं पर अच्छी पकड़ होने से न्यायिक सेवा में करियर बनाने के इच्छुक अभ्यर्थी को संस्थाओं का सही वर्गीकरण करनेपूंजी संरचना संबंधी प्रश्नों का समाधान करने और अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में सहायता मिलती है।