आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / करेंट अफेयर्स

सांविधानिक विधि

विदेश यात्रा के अधिकार का समावेशन

    «
 09-Feb-2026

मधु सिंह बनाम झारखंड राज्य (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के माध्यम से) 

"विदेश यात्रा का अधिकार एक महत्त्वपूर्ण बुनियादी मानवाधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन मौलिक अधिकार का भाग है ।" 

न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी 

स्रोत: झारखंड उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी नेमधु सिंह बनाम झारखंड राज्य (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के माध्यम से) (2025) केमामले में झारखंड के पूर्व विधायक कमलेश कुमार सिंह की पत्नी पर लगाई गई जमानत की शर्तों में संशोधन कियाजिससे उन्हें विचारण की आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए लिवर की गंभीर बीमारी के उपचार के लिये विदेश यात्रा करने की अनुमति मिली।   

मधु सिंह बनाम झारखंड राज्य (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के माध्यम से) (2025) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • याचिकाकर्त्ता अपने पतिझारखंड के पूर्व विधायक और मंत्री कमलेश कुमार सिंह के विरुद्ध लगे आरोपों से संबंधित आय से अधिक संपत्ति के मामले में अभियुक्त थी। 
  • उन्हें 13 मई 2014 को B.A. No. 3581/2014 में नियमित जमानत दी गई थीजिसमें पासपोर्ट जमा करने और विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की शर्तें सम्मिलित थीं। 
  • याचिकाकर्त्ताजिनकी आयु लगभग 58 वर्ष हैएक गंभीर और जानलेवा यकृत रोग (लिवर की बीमारीसे पीड़ित थी 
  • नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में 25 जून 2025 को किये गए लिवर बायोप्सी से लैनेक सिरोसिस सबस्टेज-4B का पता चलाजो कि क्रोनिक लिवर रोग का एक उन्नत चरण है। 
  • चिकित्सा रिपोर्टों ने पुष्टि की कि सबस्टेज-4B सिरोसिस चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त पूर्व-कैंसर स्टेज है। 
  • याचिकाकर्त्ता के करीबी नातेदार अमेरिका और ब्रिटेन में रह रहे थेऔर वह बेहतर उपचार के लिये इनमें से किसी भी देश की यात्रा करना चाहती थी। 
  • याचिकाकर्त्ता 2014 से ही विचारण में सहयोग कर रही थी और उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया था। 
  • जमानत आदेश के अधीन उनका पासपोर्ट 2014 में जमा कर दिया गया था। 
  • इस मामले में 100 से अधिक साक्षियों में से अब तक केवल 46 की ही परीक्षा की जा सकी हैजो विचारण की धीमी प्रगति को दर्शाता है। 
  • CBI ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्त्ता पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगाया गया था और जमानत देते समय समन्वय पीठ द्वारा यात्रा प्रतिबंध लगाया गया था। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • न्यायालय ने नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित संस्थानइंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज की चिकित्सा रिपोर्टों पर ध्यान दियाजिसमें याचिकाकर्त्ता की गंभीर चिकित्सा स्थिति की पुष्टि की गई थी। 
  • चिकित्सा रिपोर्टों से यह स्थापित हुआ कि याचिकाकर्त्ता सिरोसिस (cirrhosis) से पीड़ित थी, जिसमें संभवतः अंतर्निहित ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस और प्राथमिक पित्तवाहिनीशोथ का मिश्रण और लैनेक सिरोसिस सबस्टेज-4B शामिल था। 
  • न्यायालय ने अभिलिखित किया कि ऐसा कोई आरोप नहीं था कि याचिकाकर्त्ता ने विचारण में सहयोग नहीं किया या किसी साक्षी को प्रभावित करने का प्रयत्न किया। 
  • न्यायालय ने विदेश यात्रा के अधिकार की मौलिक प्रकृति के संबंध में मेनका गांधी बनाम भारत संघ और सतीश चंद्र वर्मा बनाम भारत संघ के मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्णयों पर विश्वास किया 
  • न्यायालय ने कहा किविदेश यात्रा का अधिकार एक महत्त्वपूर्ण बुनियादी मानवाधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार का भाग है। 
  • न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्त्ता की उन्नत चरण 4B सिरोसिस और उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुएदिनांक 13.05.2014 के जमानत आदेश में संशोधन किया जा सकता है। 
  • न्यायालय ने याचिकाकर्त्ता के पक्ष में उसका पासपोर्ट जारी करने का निदेश दिया। 
  • न्यायालय ने याचिकाकर्त्ता पर शर्तें अधिरोपित कीजिसके अधीन उसे प्रत्येक प्रस्तावित विदेश यात्रा के लिये संबंधित न्यायालय के समक्ष एक वचन पत्र दाखिल करना होगाजिसमें यात्रा की अवधि और भारत लौटने की तिथि निर्दिष्ट हो। 
  • याचिकाकर्त्ता को प्रत्येक यात्रा से लौटने पर न्यायालय को सूचित करने का निदेश दिया गया था। 
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट इस शर्त के अधीन जारी किया जाएगा कि याचिकाकर्त्ता को विदेश यात्रा के प्रत्येक मामले के लिये संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति लेनी होगी। 

विदेश यात्रा का अधिकार क्या है? 

बारे में: 

  • भारत के संविधान में विदेश यात्रा के अधिकार का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है। 
  • तथापिइसको संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन प्रत्याभूत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के एक भाग के रूप में निर्वचन किया गया है। 

संबंधित उपबंध: 

  • अनुच्छेद 21:किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगासिवाय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार। 
  • अनुच्छेद 19(1)(घ):यह अनुच्छेद आवागमन की स्वतंत्रता को प्रत्याभूत करता हैजिसका निर्वचन देश के भीतर यात्रा करने के अधिकार को सम्मिलित करने के रूप में किया जाता है। 
  • अनुच्छेद 19(1)():यह अनुच्छेद वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रत्याभूत करता हैजिसका शैक्षिकसांस्कृतिक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिये विदेश यात्रा के अधिकार को शामिल करने के रूप में निर्वचन किया जा सकता है।  

विधिक निर्णय: 

  • सतवंत सिंह साहनी बनाम डी. रामारत्नमसहायक पासपोर्ट अधिकारीभारत सरकारनई दिल्ली (1967): 
    • उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन एक मौलिक अधिकार हैऔर सरकार विधि द्वारा स्थापित वैध प्रक्रिया के बिना पासपोर्ट जारी करने से इंकार नहीं कर सकती या उसे जब्त नहीं कर सकती। 
    • न्यायालय ने याचिकाकर्त्ताओं के पासपोर्ट और पासपोर्ट संबंधी सुविधाओं को बहाल करने के लिये सरकार को निदेश देते हुए एक परमादेश याचिका जारी की।
  • मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): 
    • इस मामले मेंउच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के दायरे का विस्तार किया और यह निर्णय दिया कि प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार में विदेश यात्रा का अधिकार भी सम्मिलित है। 
    • न्यायालय ने यह भी निर्णय दिया कि किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने के लिये विधि द्वारा विहित कोई भी प्रक्रिया निष्पक्षन्यायसंगत और युक्तियुक्त होनी चाहिये