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सिविल कानून
मोटर दुर्घटना मामलों में विधिक प्रतिनिधियों को प्रतिकर
« »08-Jan-2026
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रत्नू राम बनाम हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम और अन्य "पिता अपने मृत पुत्र के विधिक प्रतिनिधि के रूप में प्रतिकर का हकदार हैं, भले ही वे आश्रितता साबित न कर पाएं।" न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज |
स्रोत: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
चर्चा में क्यों?
रत्नू राम बनाम हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम और अन्य (2025) के मामले में न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की पीठ ने मोटर दुर्घटना में अपने 18 वर्षीय पुत्र की मृत्यु के लिये पिता को दिये गए प्रतिकर को 1,52,000 रुपए से बढ़ाकर 4,05,000 रुपए कर दिया और ब्याज दर को 7.5% से बढ़ाकर 9% प्रति वर्ष कर दिया।
- न्यायालय ने निर्णय दिया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मृतक के पिता को इस आधार पर प्रतिकर देने से इंकार नहीं कर सकता कि वह आर्थिक रूप से अपने पुत्र पर निर्भर नहीं था।
रत्नू राम बनाम हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम और अन्य (2025) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी ?
- अपीलकर्त्ता के पुत्र सुरेश की 8 सितंबर, 1992 को एक मोटर वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जब वह 18 वर्ष का था।
- अपीलकर्त्ता ने मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 163-क के अधीन दावा याचिका दायर कर 15,00,000 रुपए के प्रतिकर के साथ-साथ 18% प्रति वर्ष की दर से ब्याज की मांग की।
- शिमला स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण-III ने शुरू में केवल 1,52,000 रुपए का प्रतिकर दिया, जिस पर 7.5% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देना था।
- अधिकरण ने माना कि अपीलकर्त्ता मृतक पर आश्रित नहीं था, किंतु संपत्ति को हुए नुकसान के आधार पर प्रतिकर प्रदान किया।
- अपीलकर्त्ता ने इस निर्णय को अपर्याप्त बताते हुए चुनौती दी और तर्क दिया कि आश्रितता संबंधी निष्कर्ष गलत थे और प्रतिकर अपर्याप्त था।
- अपीलकर्त्ता ने तर्क दिया कि संतान स्नेह (filial consortium) के लिये कोई प्रतिकर नहीं दिया गया और ब्याज दर बहुत कम थी।
- प्रत्यर्थी निगम ने एक समय 1,00,000 रुपए की एकमुश्त निपटान राशि की पेशकश की थी, जिसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थी?
- न्यायालय ने माना कि अधिकरण द्वारा पिता को विधिक प्रतिनिधि के रूप में प्रतिकर देने से इंकार करना त्रुटिपूर्ण था, इस बात पर बल देते हुए कि आश्रित न होने पर भी, वह मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने का हकदार है।
- गुजरात एस.आर.टी.सी. बनाम रमनभाई प्रभातभाई (1987) और एन. जयश्री बनाम चोलमंडालम एम.एस. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2022) का हवाला देते हुए, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम के अधीन विधिक प्रतिनिधि' का अर्थ विधिक उत्तराधिकारी से व्यापक है, जिसमें मृतक की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भी व्यक्ति सम्मिलित है जिसे क्षतिपूर्ति लाभ प्राप्त करने का विधिक अधिकार है।
- न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि मोटर यान अधिनियम एक उदार विधि है जिसके विधायी उद्देश्य को पूरा करने के लिये उदार निर्वचन की आवश्यकता है।
- प्रतिकर की गणना के लिये, न्यायालय ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम प्रणय सेठी (2017) पर विश्वास किया, जिसमें मृतक 18 वर्षीय छात्र के लिये 25,000 रुपए प्रति वर्ष की काल्पनिक आय को 18 के गुणक के साथ अपनाया गया, भविष्य की संभावनाओं के लिये 40% जोड़ा गया और चूँकि वह अविवाहित था, इसलिये व्यक्तिगत खर्चों के रूप में 50% की कटौती की गई।
- न्यायालय ने मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम नानू राम (2018) और प्रणय सेठी दिशानिर्देशों के अनुसार पिता को संतान संबंधी सहायता (50,000 रुपए), संपत्ति की हानि (20,000 रुपए) और अंतिम संस्कार व्यय (20,000 रुपए) का हकदार माना।
- तीन न्यायाधीशों की पीठ के पूर्व निर्णयों के आधार पर ब्याज दर को 7.5% से बढ़ाकर 9% प्रति वर्ष कर दिया गया, साथ ही यह निदेश भी दिया गया कि 90 दिनों से अधिक विलंबित संदाय पर 12% ब्याज लगेगा।
मोटर यान अधिनियम, 1988 क्या है?
बारे में:
- मोटर यान अधिनियम, 1988 दिनांक 1 जुलाई 1989 से प्रवृत्त हुआ, जिसका उद्देश्य भारत में विद्यमान समस्त मोटर यान संबंधी विधानों का समेकन करना था।
- यह अधिनियम सड़क परिवहन वाहनों का विनियमन करता है, जिसमें लाइसेंसिंग, रजिस्ट्रीकरण, परमिट, बीमा, यातायात नियमों तथा दण्डात्मक उपबंधों का समावेश है।
- इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को प्रभावी अनुतोष प्रदान करना तथा कठोर अनुपालन तंत्रों के माध्यम से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रमुख उद्देश्य:
- कठोर लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं तथा उनकी वैधता से संबंधित मानकों को लागू करना।
- खतरनाक पदार्थों के परिवहन के विनियमन एवं प्रदूषण नियंत्रण के माध्यम से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- देशभर में वाहनों की तीव्र वृद्धि का प्रभावी प्रबंधन करना।
- हिट-एंड-रन दुर्घटना के पीड़ितों के लिये प्रतिकर में वृद्धि करना।
- दुर्घटना पीड़ितों प्रतिकर दावे दायर करने की समय-सीमा को समाप्त करना।
लाइसेंसिंग आवश्यकताएँ:
आवश्यक उपबंध:
- धारा 3 : वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना कोई भी व्यक्ति सार्वजानिक स्थान पर मोटर यान नहीं चला सकता है।
- धारा 4 : न्यूनतम आयु सीमा - हल्के मोटर वाहनों के लिये 18 वर्ष, 50cc से कम इंजन क्षमता वाले वाहनों के लिये 16 वर्ष और सार्वजानिक परिवहन वाहनों के लिये 20 वर्ष।
- धारा 5 : वाहन स्वामी बिना लाइसेंस वाले व्यक्तियों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दे सकते।
- धारा 6 : एक साथ कई वैध लाइसेंस रखने पर प्रतिबंध।
शिक्षार्थी (लर्नर) लाइसेंस पर प्रतिबंध:
- परिवहन वाहन के लिये लर्नर लाइसेंस प्राप्त करने के लिये कम से कम एक वर्ष से लाइट मोटर वाहन लाइसेंस धारक होना आवश्यक है (ई-कार्ट और ई-रिक्शा के सिवाय)।
- 18 वर्ष से कम आयु के अवयस्कों को मोटरसाइकिल सीखने का लाइसेंस प्राप्त करने के लिये संरक्षक की लिखित सहमति आवश्यक है।
रजिस्ट्रीकरण की आवश्यकताएँ:
अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण:
- धारा 39 : बिना रजिस्ट्रीकरण के सार्वजानिक स्थानों पर कोई भी मोटर वाहन नहीं चलाया जा सकता।
- धारा 40 : रजिस्ट्रीकरण स्वामी के निवास स्थान या वाहन के प्राथमिक स्थान पर अधिकारिता रखने वाले प्राधिकरण के पास किया जाना चाहिये।
- धारा 41 : रजिस्ट्रीकरण की वैधता जारी होने की तारीख से 15 वर्ष है, जिसे विहित अनुसार नवीनीकृत किया जा सकता है।
रजिस्ट्रीकरण प्रक्रिया:
- विहित प्रपत्र में आवश्यक दस्तावेज़ों और शुल्क के साथ आवेदन पत्र प्रस्तुत करें।
- वाहन को निरीक्षण के लिये भौतिक रूप से प्रस्तुत करना होगा।
- राज्य-विशिष्ट अक्षरों और संख्याओं के साथ अद्वितीय रजिस्ट्रीकरण चिह्न का आवंटन।
- स्वामी के नाम पर जारी रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र।
परमिट और अनुपालन:
परमिट संबंधी आवश्यकताएँ:
- धारा 66 : सार्वजनिक स्थानों पर परिवहन वाहनों के संचालन के लिये वैध परमिट आवश्यक हैं।
- अपवादों में सरकारी वाहन, एम्बुलेंस, अग्निशमन दल, पुलिस वाहन और शव वाहन शामिल हैं।
- शैक्षणिक संस्थानों की बसों के लिये फिटनेस परीक्षण के साथ अनिवार्य परमिट की आवश्यकता होती है।
गति और वजन संबंधी सीमाएँ:
- धारा 112 : अधिकतम और न्यूनतम प्रतिबंधों के साथ गति सीमा लागू की जाएगी।
- धारा 113 : खाली और भरे वाहनों के लिये वजन प्रतिबंधों को कठोरतापूर्वक विनियमित किया गया है।
- राज्य सरकारों को सुरक्षा के लिये अस्थायी गति प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।
सुरक्षा उपाय:
अनिवार्य सुरक्षा आवश्यकताएँ:
- धारा 128 : दोपहिया वाहन चालकों के लिये उचित बैठने की व्यवस्था के साथ एक अतिरिक्त यात्री की सीमा।
- धारा 129 : चालकों और सवारों के लिये हेलमेट का अनिवार्य उपयोग (पगड़ी पहनने वाले सिखों को छूट)।
- चालकों के लिये सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है।
- चार वर्ष से कम आयु के बालकों के लिये बाल सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
दस्तावेज़ीकरण संबंधी आवश्यकताएँ:
- धारा 130 : चालकों को मांगे जाने पर लाइसेंस, रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र, बीमा और फिटनेस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
- यदि दस्तावेज़ तुरंत उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें 15 दिनों के भीतर जमा किया जा सकता है।
- 2020 के संशोधनों के अधीन अब डिजिटल प्रतियाँ स्वीकार्य हैं।
दुर्घटना संबंधी प्रक्रियाएँ और प्रतिकर:
चालक का उत्तरदायित्त्व:
- धारा 134 : दुर्घटना के कारण क्षति या मृत्यु होने की स्थिति में:
- घायल व्यक्तियों के लिये चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करें।
- पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाएं।
- 24 घंटे के भीतर पुलिस को सूचित करें।
- दुर्घटना का विवरण बीमा कंपनी को लिखित रूप में प्रदान करें।
प्रतिकर ढाँचा:
- धारा 140 (अब हटा दी गई): पहले मृत्यु के लिये 50,000 रुपए और स्थायी नि:शक्तता के लिये 25,000 रुपए का गैर-दोष दायित्त्व प्रतिकर प्रदान करती थी।
- धारा 163क : उपेक्षा साबित किये बिना प्रतिकर के संदाय के लिये संरचित सूत्र।
- धारा 166 : प्रतिकर दावों के लिये आवेदन प्रक्रिया।
- धारा 165 : दावों के निपटारे के लिये मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों की स्थापना।
दावा अधिकरण:
- राज्य सरकारें विशिष्ट क्षेत्रों के लिये मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण स्थापित करती हैं।
- सदस्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश होने चाहिये या रह चुके होने चाहिये।
- यह संस्था मृत्यु, शारीरिक क्षति और संपत्ति क्षति से संबंधित दावों को संभालती है।
दण्ड एवं अपराध:
प्रमुख उल्लंघन और दण्ड:
- बिना लाइसेंस के वाहन चलाना (धारा 181) : 5,000 रुपए का जुर्माना और/या 3 मास का कारावास।
- शराब पीकर गाड़ी चलाना (धारा 185) : 10,000 रुपए का जुर्माना और/या 6 मास का कारावास (पहला अपराध); 15,000 रुपए और/या 2 वर्ष (दोबारा अपराध)।
- खतरनाक वाहन चलाना (धारा 184) : 1,000-5,000 रुपए का जुर्माना और/या 6 मास का कारावास।
- ओवरस्पीडिंग (धारा 183) : वाहन के प्रकार के आधार पर 1,000-4,000 रुपए का जुर्माना
- सामान्य उल्लंघन (धारा 177) : 500 रुपए (प्रथम अपराध), 1,000 रुपए (बाद के अपराध)।
2019 संशोधन की मुख्य बातें:
प्रमुख परिवर्तन:
- आधार कार्ड लिंक करना : लाइसेंस और रजिस्ट्रीकरण के लिये अनिवार्य है।
- दण्डों में वृद्धि: विभिन्न उल्लंघनों के लिये जुर्माने में काफी वृद्धि की गई है।
- वाहन वापसी संबंधी प्रावधान : केंद्र सरकार दोषपूर्ण या असुरक्षित वाहनों को वापस बुला सकती है।
- टैक्सी एग्रीगेटर : डिजिटल राइड-बुकिंग प्लेटफॉर्म के लिये नया लाइसेंसिंग ढाँचा।
- सड़क ठेकेदार की जवाबदेही : दोषपूर्ण सड़क डिजाइन के लिये 1 लाख रुपए तक का जुर्माना।
नई योजनाएँ और कोष:
- गोल्डन आवर स्कीम (धारा 162) : दुर्घटना पीड़ितों के लिये महत्त्वपूर्ण पहले घंटे के भीतर नकद रहित उपचार।
- मोटर वाहन दुर्घटना कोष (धारा 164ख) : हिट-एंड-रन पीड़ितों के लिये प्रतिकर कोष और उपचार लागत।
- अंतरिम अनुतोष योजना (धारा 164क) : दावेदारों के लिये तत्काल सहायता।
वर्धित प्रतिकर:
- धारा 164 : दोष सिद्ध किए बिना मृत्यु की स्थिति में 5 लाख रुपए, घोर क्षति के लिये 2.5 लाख रुपए।
- हिट-एंड-रन के प्रतिकर की राशि मृत्यु होने पर 25,000 रुपए से बढ़कर 2 लाख रुपए और घोर क्षति पर 12,500 रुपए से बढ़कर 50,000 रुपए हो गई है।
- बीमा दावों का निपटारा एक महीने के भीतर किया जाना चाहिये।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड:
- यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा पर सलाह देने के लिये 2019 के संशोधन के तहत अधीन किया गया।
- इसमें सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं।
- नीति निर्माण और कार्यान्वयन की निगरानी पर ध्यान केंद्रित करता है।