एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / करेंट अफेयर्स

वाणिज्यिक विधि

माल और सेवा कर अपील में प्रक्रियात्मक आवश्यकताएँ

    «
 29-Nov-2025

मेसर्स सन ग्लास वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य 

"माल और सेवा कर अधिनियम में याचिकाकर्त्ता को उचित सूचना दिये बिना निर्णय सुरक्षित रखने और बाद में सुनाने का कोई प्रावधान नहीं है।" 

न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल 

स्रोत: इलाहाबाद उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने मेसर्ससन ग्लास वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2025)के मामले में प्रक्रियात्मक अनियमितता के आधार पर अपर आयुक्त द्वारा पारित अपीलीय आदेश को रद्द कर दियाजहाँ निर्णय सुरक्षित रखा गया था और याचिकाकर्त्ता को उचित नोटिस दिये बिना सुनाया गया था। 

मेसर्स सन ग्लास वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2025) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • याचिकाकर्त्तामेसर्स सन ग्लास वर्क्स प्राइवेट लिमिटेडएक निजी लिमिटेड कंपनी है जो कांच की बोतलों के विनिर्माण और विक्रय में लगी हुई है। 
  • मार्च 2021 के दौरानयाचिकाकर्त्ता ने रजिस्ट्रीकृत डीलरों से कांच की बोतलें बनाने के लिये कच्चे माल के रूप में विभिन्न प्रकार के रसायन खरीदेजिन्होंने उचित कर चालान जारी किये 
  • 17 फरवरी 2022 कोमाल और सेवा अधिनियम की धारा 74(1) के अधीनकारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसमें अभिकथित किया गया था कि कपट या मिथ्या कथन के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया था। 
  • याचिकाकर्त्ता ने कर चालानबैंक स्टेटमेंट और फॉर्म GSTR2-A की प्रतियों सहित सहायक दस्तावेज़ों के साथ एक विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया। 
  • 10 मई 2022 को मूल्यांकन प्राधिकारी ने कथित सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रति या याचिकाकर्त्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान किये बिना कर और जुर्माना की मांग करते हुए एक आदेश पारित किया। 
  • 10 मई 2022 के आदेश से व्यथित होकर याचिकाकर्त्ता ने अपर आयुक्तग्रेड-2 (अपील)मैनपुरी के समक्ष अपील दायर की। 
  • 18 सितंबर 2024 को अपीलीय प्राधिकारी ने सुनवाई की तारीख तय कीजिसके दौरान निर्णय सुरक्षित रखा गया। 
  • तत्पश्चात् 25 सितंबर 2024 को अपील खारिज करते हुए निर्णय सुनाया गयाकिंतु याचिकाकर्त्ता को इस तिथि की सूचना नहीं दी गई। 
  • याचिकाकर्त्ता ने रिट याचिका के माध्यम से 10 मई 2022 के मूल आदेश और 25 सितंबर 2024 के अपीलीय आदेश दोनों को चुनौती दी। 

न्यायालय की टिप्पणियां क्या थीं? 

  • न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्त्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया किमाल और सेवा कर अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहींहै जो पक्षकारों को नोटिस दिये बिना निर्णय सुरक्षित रखने और बाद में निर्णय सुनाने की अनुमति देता हो। 
  • याचिकाकर्त्ता ने मेसर्स वंडर एंटरप्राइजेज बनाम अपर आयुक्तग्रेड-एवं अन्य मामले में स्थापित पूर्व निर्णय पर विश्वास कियाजिस पर 12 सितंबर 2024 को निर्णय हुआ। 
  • अपर आयुक्त ने न्यायालय के आदेश के अनुसरण में व्यक्तिगत शपथपत्र दायर कियाकिंतु इसमें किसी ऐसे प्रावधान या अधिसूचना का उल्लेख नहीं किया जो प्राधिकारी को नोटिस जारी किये बिना या सुनवाई का अवसर दिये बिना सुनवाई की तिथि के सिवाय किसी अन्य तिथि पर निर्णय पारित करने का अधिकार देता हो। 
  • न्यायालय ने कहा कि यह विवाद्यक मेसर्स वंडर एंटरप्राइजेज मामले में दिये गए निर्णय में स्पष्ट रूप से सम्मिलित है। 
  • न्यायालय ने कहा कि विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, 25 सितंबर 2024 का आदेश विधि की दृष्टि में सही नहीं ठहराया जा सकता। 
  • न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि इस मामले परप्रक्रियागत आवश्यकताओं के उचित पालन के साथ पुनर्विचार की आवश्यकता है। 
  • अपर आयुक्तग्रेड-2 (अपील)मैनपुरी द्वारा पारित दिनांक 25 सितंबर 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया गया। 
  • रिट याचिका को स्वीकार कर लिया गयातथा मामले को पुनः निर्णय के लिये अपर आयुक्त के पास वापस भेज दिया गया। 
  • न्यायालय ने निदेश दिया कि अपीलीय प्राधिकारी को सभी हितधारकों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करना चाहिये 
  • न्यायालय ने आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तिथि से तीन महीने के भीतर शीघ्र निपटान का आदेश दिया। 

माल और सेवा कर (GST) अधिनियम, 2017 क्या है? 

बारे में: 

  • 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2017 द्वारा प्रस्तुतयह भारत में माल और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाने वाला एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है।  
  • यह एक मूल्य वर्धित कर (value-added tax (VAT)) है जिसने केंद्र और राज्यों द्वारा पहले लगाए जाने वाले अनेक अप्रत्यक्ष करों का स्थान ले लिया है। 

प्रमुख विशेषताऐं: 

  • दोहरी माल और सेवा कर संरचना:इसमें केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) और राज्य माल और सेवा कर (SGST) सम्मिलित हैंएकीकृत माल और सेवा कर (IGST) अंतर-राज्यीय संव्यवहार के लिये लागू है। 
  • माल और सेवा कर परिषद:यह माल और सेवा कर नीति निर्धारण और दर निर्णय के लिये प्राथमिक निकाय है। 
    • माल और सेवा कर परिषद केंद्र और राज्यों का संयुक्त मंच है। 
    • इसे संशोधित संविधान के अनुच्छेद 279 (1) के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा स्थापित किया गया था। 

सदस्य: 

  • परिषद के सदस्यों में केंद्रीय वित्त मंत्री (अध्यक्ष)केंद्र से केंद्रीय राज्य मंत्री (वित्त) सम्मिलित हैं।  
  • प्रत्येक राज्य वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री या किसी अन्य मंत्री को सदस्य के रूप में नामित कर सकता है। 

कार्य: 

  • अनुच्छेद 279 के अनुसारपरिषद का उद्देश्य “माल और सेवा कर से संबंधित महत्त्वपूर्ण विवाद्यकों पर केंद्र और राज्यों को सिफारिशें करना हैजैसे कि वे माल और सेवाएँ जो माल और सेवा कर के अधीन हो सकती हैं या माल और सेवा कर से छूट प्राप्त हो सकती हैंमॉडल माल और सेवा कर विधि।”  
  • माल और सेवा कर नेटवर्क (GSTN):भारत में करदाताओं को रिटर्न तैयार करनेदाखिल करनेअप्रत्यक्ष कर देनदारियों का संदाय करने और अन्य अनुपालन करने में सहायता करना।  
  • सीमा छूट:एक निश्चित सीमा से कम टर्नओवर वाले छोटे कारबारों कोमाल और सेवा कर से छूट दी गई है।इससे अनुपालन आसान हो जाता है और सूक्ष्म उद्यमों को अत्यधिक कागजी कार्रवाई से सुरक्षा मिलती है।