9 मार्च से शुरू हो रहे हमारे ऑल-इन-वन ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स के साथ अपनी ज्यूडिशियरी की तैयारी को मजबूत बनाएं | यह कोर्स अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों माध्यमों में उपलब्ध है।   |   आज ही हमारे ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन लें और अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएँ | हिंदी माध्यम बैच: 9 मार्च, सुबह 8 बजे   |   आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / कंपनी अधिनियम

सिविल कानून

कंपनी अधिनियम के अंतर्गत डिबेंचर

    «
 20-Mar-2026

परिचय 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(30) डिबेंचर कोपरिभाषित करती है जिसमें डिबेंचर स्टॉकबंधपत्रया किसी कंपनी का कोई अन्य साधन शामिल है जो ऋण को प्रमाणित करता हैचाहे वह कंपनी की परिसंपत्तियों पर प्रभार का गठन करता हो या नहीं। 

  • डिबेंचर मूल रूप सेसंयुक्त स्टॉक कंपनी द्वारा प्राइवेट या निजी निवेशकों से उधार पूँजी जुटाने के लिये जारी किये गएऋण साधन हैं। 
  • इस प्रकार एकत्रित की गई राशि कंपनी की अंश पूँजी से भिन्न ऋण पूँजी का भाग होती है। डिबेंचर धारक कंपनी के लेनदार होते हैंस्वामी नहींऔर इसलिये वे लाभांश के बजाय ब्याज के हकदार होते हैं। 

डिबेंचर की विशेषताएँ  

कॉर्पोरेट विधि के अंतर्गत डिबेंचरों की कई विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं: 

  • ऋण का स्वरूप:डिबेंचर एक कंपनी द्वारा जारी किये गए ऋण के साधन हैंजो एक सहमत दर पर ब्याज के साथ मूलधन चुकाने के अपने दायित्त्व को स्वीकार करते हैं। 
  • निश्चित ब्याज दर:डिबेंचर पर ब्याज एक निश्चित दर पर देय होता हैचाहे कंपनी ने लाभ अर्जित किया हो या नहींजो इसे लाभांश से मौलिक रूप से अलग करता हैजो लाभ पर निर्भर होता है। 
  • डिबेंचर का मोचन:सामान्यतः डिबेंचर एक निश्चित अवधि के अंत में चुकाए जाने योग्य होते हैं। कंपनी के बही-खातों में डिबेंचर देयता का भुगतान या निरस्तीकरणडिबेंचर का मोचनकहलाता है । 
  • जारी करने का तरीका:डिबेंचर सममूल्य (par), प्रीमियम या छूट (discount) पर जारी किये जा सकते हैंयह जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति और बाज़ार में उसकी साख पर निर्भर करता है 
  • प्रतिभूति:डिबेंचर कंपनी की परिसंपत्तियों की सुरक्षा के साथ या उसके बिना जारी किये जा सकते हैं - जिन्हें क्रमशःसुरक्षितऔरअसुरक्षितकहा जाता है। सुरक्षित डिबेंचर कंपनी की परिसंपत्तियों पर एक निश्चित या परिवर्तनशील भार रखते हैं। 
  • लिस्टिंग और रेटिंग:जहाँ सार्वजनिक सदस्यता के लिये डिबेंचर पेश किये जाते हैंउन्हें किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध किया जा सकता है और ऐसी लिस्टिंग से पहले SEBI द्वारा अनुमोदित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा रेट किया जाना अनिवार्य है। 
  • कंपनी के परिसमापन में प्राथमिकता: कंपनीके परिसमापन की स्थिति मेंलेनदार होने के नातेडिबेंचर धारकों कोकंपनी की प्राप्त संपत्तियों से अंशधारकों की तुलनामें पुनर्भुगतान में प्राथमिकता दी जाती है। 
  • मतदान का अधिकार नहीं:डिबेंचर धारकों के पास सामान्यतः मतदान का अधिकार नहीं होता है और कंपनी के निदेशक मंडल में उनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता है। 

शेयरों और डिबेंचरों के बीच अंतर 

आधार 

अंश  

डिबेंचर 

अर्थ 

अंश कंपनी की स्वामित्व वाली पूँजी का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

डिबेंचर कंपनी की उधार ली गई पूँजी का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

प्रकृति 

स्वामित्व का साधन। 

ऋणबद्धता (ऋण) का साधन। 

धारक 

अंशधारक या सदस्य कहलाता है।  

डिबेंचर धारक कहलाता है। 

स्थिति 

कंपनी का स्वामी। 

कंपनी का लेनदार।  

वापस करना 

लाभांश।  

ब्याज।  

वापसी का भुगतान 

लाभांश केवल अर्जित लाभ से ही देय होता है।  

ब्याज लाभ या हानि की परवाह किये बिना देय होता है। 

वापसी की दर  

निश्चित नहींलाभ एवं निदेशक मंडल के विवेक पर निर्भर।  

निश्चित दरनिर्गमन के समय निर्धारित।  

मताधिकार 

अंशधारकों को मताधिकार प्राप्त होता है। 

डिबेंचर धारकों को मताधिकार प्राप्त नहीं होता।  

पुनर्भुगतान 

कंपनी के जीवनकाल में सामान्यतः पुनर्भुगतान नहीं। 

निश्चित अवधि के पश्चात मोचन (Redemption) के माध्यम से पुनर्भुगतान। 

प्रतिभूति  

कंपनी की परिसंपत्तियों पर कोई भार (Charge) निर्मित नहीं होता। 

कंपनी की परिसंपत्तियों पर भार द्वारा सुरक्षित किये जा सकते हैं। 

परिसमापन में प्राथमिकता 

सभी ऋणदाताओं के संतुष्ट होने के पश्चात भुगतान।  

अंशधारकों की अपेक्षा प्राथमिकता से भुगतान।  

परिवर्तन  

अंशों को डिबेंचर में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।  

डिबेंचरों को अंशों में परिवर्तित किया जा सकता है (यदि शर्त हो)।  

ट्रस्ट विलेख 

ट्रस्ट विलेख की आवश्यकता नहीं होती। 

सार्वजनिक निर्गम की स्थिति में ट्रस्ट विलेख का निष्पादन अनिवार्य होता है।  

प्रबंधन में भागीदारी 

अंशधारक कंपनी के प्रबंधन में भाग लेते हैं।  

डिबेंचर धारकों की प्रबंधन में कोई भूमिका नहीं होती।  

सेबी (SEBI) सूचीकरण/रेटिंग 

अंशों के लिये अनिवार्य नहीं है।  

सार्वजनिक सदस्यता के लिये उपलब्ध कराए जाने पर आवश्यक है।  

शासी उपबंध 

धारा 2(84), कंपनी अधिनियम, 2013 

धारा 2(30), कंपनी अधिनियम, 2013  

 निष्कर्ष 

कॉर्पोरेट संरचना में डिबेंचर ऋण वित्तपोषण का एक महत्त्वपूर्ण साधन हैजो कंपनियों को स्वामित्व या नियंत्रण को कम किये बिना दीर्घकालिक पूँजी जुटाने में सक्षम बनाता है। कंपनी अधिनियम, 2013 इनके निर्गमनसुरक्षामोचन और डिबेंचर धारकों के अधिकारों को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करता है - कंपनियों की वित्तीय आवश्यकताओं और उनमें निवेश करने वाले लेनदारों के वैध हितों के बीच संतुलन बनाए रखता है।