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सिविल कानून
किसी कंपनी की सदस्यता
«19-Mar-2026
परिचय
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(55) के अंतर्गत कंपनी के सदस्य को निम्नलिखित के रूप में परिभाषित किया गया है:
- कंपनी ज्ञापन के हस्ताक्षरकर्ता।
- प्रत्येक व्यक्ति जो लिखित रूप में सदस्य बनने के लिये सहमत होता है और जिसका नाम सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज होता है।
- प्रत्येक व्यक्ति जिसके पास अंश हैं और जिसका नाम जमा के अभिलेख में लाभकारी स्वामी के रूप में दर्ज है।
तथापि "सदस्य" और "शेयरधारक" शब्दों का प्रयोग सामान्यत: एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है, लेकिन वे सदैव पर्यायवाची नहीं होते हैं – अंशों का अंतरण प्राप्त करने वाला व्यक्ति तब तक सदस्य नहीं बनता जब तक कि अंतरण रजिस्ट्रीकृत नहीं हो जाता और उसका नाम सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज नहीं हो जाता।
सदस्यता को मान्यता देने से पहले दो आवश्यक शर्तें पूरी होनी चाहिये:
- सदस्य बनने के लिये करार।
- सदस्य रजिस्टर में व्यक्ति का नाम दर्ज करना।
सदस्यता प्राप्त करने के तरीके
- अंशदान ज्ञापन की सदस्यता: कंपनी ज्ञापन के लिये हस्ताक्षरकर्ता को निगमन के समय ही सदस्य बनने के लिये सहमत माना जाता है, इसके लिये किसी आवेदन या आवंटन की आवश्यकता नहीं होती है। वह निगमन की तिथि से स्वतः ही सदस्य बन जाता है और प्रवर्तकों द्वारा कपट के आधार पर भी संविदा को रद्द नहीं कर सकता है।
- लिखित करार, जो निम्न माध्यमों से हो सकता है:
- अंशों के लिये आवेदन और आवंटन।
- सदस्यों के रजिस्टर में ऐसे अंतरण के रजिस्ट्रीकरण पर अंशों का अंतरण।
- विधि के संचालन द्वारा अंशों का अंतरण, जैसे कि किसी सदस्य की मृत्यु पर, जहाँ अंतरण के किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होती है।
- सहमति या विबंध, जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर बिना किसी आपत्ति के अपना नाम रजिस्टर में बने रहने देता है।
- जमाकर्त्ता अधिनियम, 1996 के अधीन लाभकारी स्वामित्व: अंशों को धारण करने वाला और जमाकर्त्ता के अभिलेखों में लाभकारी स्वामी के रूप में दर्ज व्यक्ति कंपनी का सदस्य माना जाता है।
कौन सदस्य बन सकता है?
कोई भी व्यक्ति जो विधिक रूप से सक्षम हो (संविदा करने के लिये सक्षम हो) ज्ञापन और नियमों के अधीन सदस्य बन सकता है। उल्लेखनीय पदों में शामिल हैं:
- कंपनी — किसी अन्य कंपनी के ज्ञापन द्वारा अधिकृत होने पर उसकी सदस्य बन सकती है, लेकिन स्वयं की सदस्य नहीं बन सकती।
- सीमित दायित्त्व भागीदारी — एक निगमित निकाय होने के नाते, यह किसी कंपनी की सदस्यता धारण कर सकता है।
- धारा 8 कंपनी — यदि किसी अन्य कंपनी के ज्ञापन में इसकी अनुमति हो तो वह कंपनी के अंशों में निवेश कर सकती है।
- विदेशी नागरिक - FEMA, 1999 के प्रावधानों के अधीन सदस्यता प्राप्त कर सकते हैं।
- अवयस्क — संविदा करने में अक्षम होने के कारण, सामान्यतः सदस्य नहीं बन सकता; यद्यपि, अवयस्क को पूर्णतः भुगतान किये गए अंशों का अंतरण अस्वीकार नहीं किया जा सकता, यद्यपि हस्तांतरणकर्ता भविष्य में होने वाले दावों के लिये उत्तरदायी बना रहता है।
- दिवालिया घोषित व्यक्ति — रजिस्टर में अपना नाम दर्ज रख सकता है, लेकिन अंशों में उसका लाभकारी हित समाप्त हो जाता है, जो आधिकारिक असाइनी (Official Assignee) को प्राप्त हो जाता है।
- ट्रेड यूनियन — अपने स्वयं के कॉर्पोरेट नाम से अंश रख सकती है।
- भागीदारी फर्म – विधिक यूनिट न होने के कारण, धारा 8 कंपनी को छोड़कर किसी अन्य संस्था में सदस्य नहीं बन सकती।
- GDRs धारक - सदस्य तब तक नहीं होंगे जब तक कि ग्लोबल ज्मकर्त्ता रसीदों को अंतर्निहित अंशों में भुनाया न जाए।
सदस्यता की समाप्ति
किसी व्यक्ति का नाम सदस्यों के रजिस्टर से हटा दिये जाने पर वह सदस्य नहीं रह जाता, जो निम्नलिखित में से किसी भी स्थिति में हो सकता है:
- अंशों का अंतरण और रजिस्ट्रीकरण किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर करना।
- कंपनी द्वारा अंशों का समपहरण।
- सदस्य की मृत्यु (तथापि उसकी संपत्ति वसूली के लिये उत्तरदायी बनी रहती है)।
- दिवालियापन का निर्णय।
- प्रतिदेय अधिमान्य अंशों का मोचन।
- कपट या दुर्व्यपदेशन के आधार पर संविदा को रद्द करना।
- धारा 242 के अधीन अधिकरण के आदेश के अधीन अंशों की खरीद।
सदस्यता समाप्त होने से अंशदाता के रूप में दायित्त्व समाप्त नहीं होता। इसके अतिरिक्त, कोई भी कंपनी अपने नियमों और शर्तों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जोड़ सकती जो निदेशक मंडल को किसी सदस्य को निष्कासित करने का अधिकार देता हो — ऐसा कोई भी प्रावधान अवैध और शून्य है।
सदस्यों के अधिकार
सदस्यों को व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- संक्षिप्त वित्तीय विवरण, लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और साधारण बैठकों की सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार।
- सांविधिक रजिस्टरों का निरीक्षण करने और उनकी प्रतियाँ प्राप्त करने का अधिकार।
- साधारण बैठकों में भाग लेने और व्यक्तिगत रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से मतदान करने का अधिकार।
- अंशों के अंतरण का अधिकार।
- लाभांश घोषित होने पर उसे प्राप्त करने का अधिकार।
- धारा 62 के अधीन राइट्स शेयर के लिये आवेदन करने का अधिकार।
- धारा 152 के अधीन निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार।
- धारा 72 के अधीन किसी व्यक्ति को नामित करने का अधिकार, जिसे मृत्यु के बाद प्रतिभूतियाँ प्राप्त होंगी।
- धारा 320 के अधीन परिसमापन पर अधिशेष परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी का अधिकार।
- धारा 241 के अधीन उत्पीड़न और कुप्रबंधन के विरुद्ध अनुतोष पाने के लिये अधिकरण में सामूहिक रूप से आवेदन करने का अधिकार।
- धारा 245 के अधीन अधिकरण के समक्ष क्लास एक्शन सूट (सामूहिक वाद) दायर करने का अधिकार।
निष्कर्ष
सदस्यता की अवधारणा कंपनी विधि का मूल आधार है, जो किसी व्यक्ति और कॉर्पोरेट यूनिट के बीच संबंधों को परिभाषित करती है। कंपनी अधिनियम, 2013 सदस्यता प्राप्त करने और खोने के तरीकों, पात्र सदस्यों की श्रेणियों और सदस्यता से जुड़े अधिकारों को सावधानीपूर्वक विनियमित करता है - कॉर्पोरेट ढाँचे के भीतर जवाबदेही, पारदर्शिता और व्यक्तिगत हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
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