आज ही हमारे ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन लें और अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएँ | हिंदी माध्यम बैच: 9 मार्च, सुबह 8 बजे   |   आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / करेंट अफेयर्स

सांविधानिक विधि

राजनीतिक संघ बनाने के अधिकार का समावेशन

    «
 11-Feb-2026

विकास पुंधीरबनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य और अन्य (2026) 

"भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को प्रत्याभूत करता हैजिसमें व्यक्तिगत विकल्प चुनने की स्वायत्तता/स्वतंत्रता सम्मिलित हैजिसमें किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने और एक नागरिक द्वारा उचित समझे जाने वाले तरीके से राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होने का अधिकार सम्मिलित है ।" 

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी 

स्रोत: दिल्ली उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी नेविकास पुंधीर बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य (2026) केमामले में यह टिप्पणी की कि राजनीतिक दलों से जुड़ने और राजनीति में सक्रिय रूप से सम्मिलित होने का अधिकारभारत के संविधान, 1950 (भारत का संविधान) के अनुच्छेद 21 के अधीन संरक्षित है और दिल्ली पुलिस को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से लगातार मिल रही धमकियों का सामना कर रहे एक अधिवक्ता को आवश्यक संरक्षण प्रदान करने का निदेश दिया। 

विकास पुंधीरबनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य और अन्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • यह याचिका एक अधिवक्ता (याचिकाकर्त्ता) द्वारा दायर की गई थीजिसने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से अपने जीवन को लगातार और बार-बार मिल रही धमकियों का आरोप लगाया था। 
  • याचिकाकर्त्ता को पहली बार 2016 में धमकियाँ दी गईंजिसके बाद हर्ष विहार पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। 
  • अभियुक्तों के आश्वासनों के बाद मामला शुरू में सुलझ गया थालेकिन अभियुक्तों में से एक के जेल से छोड़े जाने के बाद 2022 में कथित तौर पर धमकियाँ फिर से शुरू हो गईं। 
  • याचिकाकर्त्ता को व्हाट्सएप पर एक कॉल आया जिसमें उसे जान से मारने की धमकी दी गई थी यदि वह राजनीति से पीछे नहीं हटता। 
  • प्रतिद्वंद्वी पार्टी के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया पर बंदूकें चलाते हुए तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करके उन्हें लगातार धमकाने के बाद आयुध अधिनियम के अधीन प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। 
  • याचिकाकर्त्ता नेदिसंबर 2025 में देर रातउनके आवास की निगरानी कर रहे संदिग्ध व्यक्तियों पर भी चिंता जताई। 
  • अनुतोष प्रदान करते हुएन्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अधीन राजनीतिक भागीदारी के सांविधानिक संरक्षण की पुष्टि की और संबंधित पुलिस अधिकारियों को याचिकाकर्त्ता को सभी आवश्यक सहायता और संरक्षण प्रदान करने का निदेश दिया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • न्यायालय ने माना किअनुच्छेद 21 न केवल प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता हैअपितु इसमेंव्यक्तिगत विकल्प चुनने की स्वायत्तताभी सम्मिलित है जैसे कि किसी राजनीतिक दल से जुड़ने और राजनीतिक क्रियाकलापों में भाग लेने का अधिकार। 
  • न्यायमूर्ति बनर्जी ने टिप्पणी की: "किसी भी व्यक्ति द्वारा या उसके द्वारा इन मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप और/या किसी के द्वारा प्रपीड़न व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा के मूल सिद्धांतों पर प्रहार करता है।" 
  • न्यायालय ने पुष्टि की कि याचिकाकर्त्ता "भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन संरक्षण का पूरी तरह हकदार है।" 
  • न्यायालय ने हर्ष विहार पुलिस थाने के SHO और बीट कांस्टेबल को निदेश दिया कि वे विधि के अनुसारजब भी आवश्यकता होयाचिकाकर्त्ता को सभी आवश्यक सहायता और संरक्षण प्रदान करने के लिये उपलब्ध रहें। 
  • न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्त्ता किसी अन्य पुलिस थाने की अधिकारिता में अपना निवास स्थान बदलता हैतो उसे संबंधित SHO को सूचित करना होगाजो तब समान संरक्षण प्रदान करने के लिये बाध्य होगा। 

भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 क्या है? 

परिचय: 

  • अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षणसे संबंधित है । इसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति को, उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।  
    • जीवन का अधिकारकेवल पशुवत अस्तित्व या जीवित रहने तक ही सीमित नहीं हैअपितु इसमेंमानवीय गरिमा के साथ जीनेका अधिकारऔर जीवन के वे सभी पहलू सम्मिलित हैं जो मनुष्य के जीवन को सार्थकपूर्ण और जीने लायक बनाते हैं। 
  • अनुच्छेद 21दो अधिकारों की सुरक्षा करता है: 
    • प्राण का अधिकार 
    • दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार 
  • इस अनुच्छेद को प्राण और दैहिक की रक्षा करने वाले प्रक्रियात्मक मैग्ना कार्टा के रूप में वर्णित किया गया है।  
  • यह मौलिक अधिकारप्रत्येक व्यक्तिचाहेवह नागरिक हो या विदेशीको समान रूप से प्राप्त है। 
  • भारत के उच्चतम न्यायालयने इस अधिकार को मौलिक अधिकारों का हृदयबताया है । 
  • यह अधिकारकेवल राज्य के विरुद्ध ही प्रदान किया गया है। 

अनुच्छेद 21 के अंतर्गत अधिकार: 

  • अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आने वाले अधिकारनिम्नलिखितहैं: 
    • निजता का अधिकार 
    • विदेश जाने का अधिकार 
    • आश्रय का अधिकार 
    • एकांत कारावास के विरुद्ध अधिकार 
    • सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण का अधिकार 
    • हथकड़ी लगाने के विरुद्ध अधिकार 
    • अभिरक्षा में मृत्यु के विरुद्ध अधिकार 
    • फाँसी में विलंब के विरुद्ध अधिकार 
    • डॉक्टरों की सहायता 10. सार्वजनिक फाँसी के विरुद्ध अधिकार 
    • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण 
    • प्रदूषण मुक्त जल और वायु का अधिकार 
    • प्रत्येक बच्चे को पूर्ण विकास का अधिकार है 
    • स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता का अधिकार 
    • शिक्षा का अधिकार 
    • विचाराधीन कैदियों का संरक्षण 

निर्णय विधि: 

  • फ्रांसिस कोराली मुलिन बनाम प्रशासक (1981) के मामलेमेंन्यायमूर्ति पी. भगवती ने कहा था कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 एक लोकतांत्रिक समाज में सर्वोच्च महत्त्व के सांविधानिक मूल्य को समाहित करता है। 
  • खरक सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1963) के मामलेमेंउच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि जीवन शब्द से केवल पशुवत अस्तित्व का ही अर्थ नहीं है। इसके हनन पर रोक उन सभी अंगों और इंद्रियों पर लागू होती है जिनके द्वारा जीवन का आनंद लिया जाता है। यह प्रावधान शरीर को विकृत करनेजैसे कि कवचधारी पैर काटनाआँख निकालना या शरीर के किसी अन्य अंग को नष्ट करना जिसके माध्यम से आत्मा बाह्य जगत से संपर्क स्थापित करती हैपर भी समान रूप से प्रतिबंध लगाता है।