होम / कंपनी अधिनियम
सिविल कानून
मुख्य अंतर: मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन बनाम आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन
«16-Mar-2026
परिचय
कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निगमित प्रत्येक कंपनी दो मूल सांविधानिक दस्तावेज़ों पर आधारित होती है: मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) । यद्यपि ये दोनों ही कंपनी के अस्तित्व के लिये अपरिहार्य हैं, फिर भी इनके उद्देश्य भिन्न और एक-दूसरे के पूरक हैं।
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(56) के अंतर्गत कंपनी का ज्ञापन (MoA) को कंपनी के मूल रूप से तैयार किये गए या समय-समय पर संशोधित किये गए दस्तावेज़ के रूप में परिभाषित किया गया है। लॉर्ड केर्न्स ने इसे कंपनी की शक्तियों को परिभाषित और सीमित करने वाले दस्तावेज़ के रूप में स्पष्ट रूप से वर्णित किया है। इसे कंपनी का चार्टर कहना उचित है ।
- धारा 2(5) के अंतर्गत परिभाषित आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में कंपनी के आंतरिक प्रबंधन एवं प्रशासन के लिये बनाए गए नियम एवं विनियम शामिल हैं। ये दस्तावेज़ मिलकर कंपनी के बाहरी जगत और उसके अपने सदस्यों के साथ संबंधों को नियंत्रित करते हैं।
|
आधार |
मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) |
आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) |
|
अर्थ |
कंपनी का चार्टर; निगमित होने की शर्तों को निर्धारित करने वाला मूल दस्तावेज़ |
आंतरिक नियमावली; कंपनी के प्रशासन और प्रबंधन के नियम |
|
सांविधिक परिभाषा |
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (56) में |
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(5) में |
|
अधीनता |
केवल कंपनी अधिनियम के अधीन |
अधिनियम तथा MoA दोनों के अधीन |
|
संघर्ष की स्थिति में |
सभी स्थितियों में MoA को वरीयता प्राप्त होती है |
MoA के अधीन; असंगत प्रावधान शून्य |
|
विषय-वस्तु |
उद्देश्य, शक्तियां, नाम, दायित्त्व, पूँजी, अधिवास |
बैठकें, मतदान, निदेशक, अंश अंतरण, लाभांश |
|
अनिवार्यता |
सभी कंपनियों के लिये अनिवार्य; धारा 4 के अंतर्गत 6 उपबंध आवश्यक |
अनिवार्य; सार्वजनिक कंपनियाँ आवश्यकता होने पर Table F को अपनाती हैं |
|
भूतलक्षी प्रभाव |
भूतलक्षी प्रभाव से संशोधन संभव नहीं |
भूतलक्षी प्रभाव से संशोधन संभव |
|
संशोधन |
विशेष प्रस्ताव तथा आवश्यकतानुसार केंद्र सरकार/क्षेत्रीय निदेशक / NCLT की स्वीकृति |
सामान्यतः सामान्य सभा में विशेष प्रस्ताव द्वारा संशोधन; सरकारी स्वीकृति सामान्यतः आवश्यक नहीं |
|
नियंत्रित संबंध |
कंपनी और बाह्य जगत के मध्य संबंध |
कंपनी और उसके सदस्यों के मध्य तथा सदस्यों के परस्पर संबंध |
|
सीमा से परे कार्य |
अधिकारातीत सिद्धांत के अंतर्गत पूर्णतः शून्य; सर्वसम्मति से भी अनुमोदित नहीं किया जा सकता |
मात्र अनियमित; अंशधारकों की सर्वसम्मति से अनुमोदित किया जा सकता है |
|
दस्तावेज़ का स्वरूप |
बाह्य दस्तावेज़; कंपनी की सार्वजनिक पहचान को निर्धारित करता है |
आंतरिक दस्तावेज़; कंपनी के आंतरिक प्रबंधन को नियंत्रित करता है |
|
प्रमुख न्यायिक निर्णय |
एशबरी रेलवे कैरिज कंपनी बनाम रिचे, लआईसी ऑफ इंडिया (1963) |
रॉयल ब्रिटिश बैंक बनाम टर्क्वांड (1856) |
महत्त्वपूर्ण सिद्धांत:
किसी भी प्रकार के संघर्ष की स्थिति में मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) को आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA)पर वरीयता प्राप्त होती है — यह सिद्धांत कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत स्थापित है।
निष्कर्ष
कंपनी का सांविधानिक ढाँचा मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन मिलकर बनाते हैं। जहाँ मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन कंपनी की शक्तियों, पहचान और अनुमत उद्देश्यों को परिभाषित करने वाले बाहरी चार्टर के रूप में कार्य करता है, वहीं आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन कंपनी के कामकाज के संचालन और सदस्यों के अधिकारों को विनियमित करने वाली आंतरिक नियमावली के रूप में कार्य करता है।
दोनों दस्तावेज़ों के बीच पदानुक्रमिक संबंध—जिसमें कंपनी का ज्ञापन (MoA) को प्राथमिकता दी जाती है—यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी के आंतरिक नियम उसके सार्वजनिक रूप से घोषित चार्टर का उल्लंघन न करें। कंपनी के ज्ञापन पर लागू होने वाले कठोर संशोधन आवश्यकताएँ विधायिका के उस आशय को दर्शाती हैं जिसके अधीन कंपनी के साथ लेन-देन करने वाले पर-पक्षकारों और लेनदारों को सुरक्षा प्रदान की जाती है। ये दोनों दस्तावेज़ मिलकर कंपनी के पूरे जीवनकाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और विधिक निश्चितता सुनिश्चित करते हैं।