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सांविधानिक विधि
राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम का वादन: राष्ट्रीय गीत प्रोटोकॉल का पुनर्मूल्यांकन
«12-Feb-2026
स्रोत: द हिंदू
परिचय
फरवरी 2026 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देशों का एक नया सेट अपलोड किया, जिसमें राज्यों और सरकारी निकायों को राष्ट्रगान, वंदे मातरम गाने और बजाने के प्रोटोकॉल के संबंध में निदेश दिये गए थे। तथापि केंद्र द्वारा कोई औपचारिक घोषणा या कथन जारी नहीं किया गया था, किंतु निदेशों में प्रदर्शन का क्रम, दर्शकों के आचरण और राष्ट्रगान बजाने के अवसरों को स्पष्ट किया गया है - जो पूरे देश में राष्ट्रीय प्रतीक प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है
भारत के राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के बारे में
जन गण मन (राष्ट्रीय गान):
- रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा मूल रूप से बांग्ला में रचित गीत 'जन गण मन' को 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा भारत के राष्ट्रगान के रूप में हिंदी संस्करण में अंगीकृत किया गया था।
- इसके वादन की अवधि लगभग 52 सेकंड है।
- इसे प्रथम बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था।
- मूल रचना का शीर्षक भारतों भाग्यो विधाता है, जिसमें कुल पाँच पद (stanzas) हैं, जिनमें से केवल प्रथम पद ही राष्ट्रगान के रूप में स्वीकृत है।
वंदे मातरम (राष्ट्रीय गीत):
- वंदे मातरम एक कविता है जिसे वर्ष 1950 में भारत गणराज्य का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।
- इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था और यह प्रथम बार 1882 में चटर्जी के बंगाली उपन्यास आनंदमठ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था।
- यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद, एकता और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक और एक एकजुटता का नारा बन गया।
- विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सभाओं में इसे गाया या बोला जाता था। वंदे मातरम का प्रसिद्ध पाठ रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अभिसमय में किया था।
24 जनवरी 1950 को संयुक्त अंगीकरण:
- उसी दिन, अर्थात् 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा में सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने यह घोषणा की कि "भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले गीत वंदे मातरम को जन गण मन के समान ही सम्मानित किया जाएगा और उसे इसके समान दर्जा प्राप्त होगा।"
- इस प्रकार, भारत के गणतंत्र बनने से दो दिन पहले, 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों को अंगीकृत किया गया था।
जारी किये गए प्रमुख दिशानिर्देश क्या हैं?
- प्रस्तुति का क्रम: सबसे महत्त्वपूर्ण निदेश यह है कि जब भी किसी समारोह में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों का गायन या वादन किया जाना हो, तो वंदे मातरम् का गायन/वादन राष्ट्रगान से पूर्व किया जाएगा। इससे आधिकारिक और अर्ध-आधिकारिक समारोहों के लिये एक स्पष्ट औपचारिक क्रम स्थापित होता है।
- श्रोताओं/दर्शकों का आचरण: जब भी राष्ट्रगान का आधिकारिक संस्करण (लगभग 3.1 मिनट लंबा) गाया या बजाया जाता है, तो श्रोतागण को सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य है। तथापि, एक अपवाद है: जब राष्ट्रगान किसी समाचार रील या वृत्तचित्र के भाग के रूप में बजाया जाता है, तो श्रोतागण को खड़े होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से प्रदर्शन बाधित होगा और राष्ट्रगान की गरिमा बढ़ाने के बजाय अव्यवस्था उत्पन्न होगी।
- राष्ट्रीय गीत के वादन के अवसर: दिशा-निर्देशों में निर्दिष्ट है कि औपचारिक राजकीय समारोहों और अन्य सरकारी समारोहों में राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान पर, अखिल भारतीय रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र संबोधन से ठीक पहले और बाद में, औपचारिक राजकीय समारोहों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन और प्रस्थान पर, जब राष्ट्रीय ध्वज परेड में लाया जाता है, और भारत सरकार द्वारा जारी किये गए किसी भी अन्य विशेष आदेश के अनुसार वंदे मातरम गाया जाएगा।
- जब बैंड द्वारा वादन किया जाए: जब वंदे मातरम का वादन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो श्रोताओं को सूचित करने के लिये गीत से पहले ढोल बजाए जाएंगे - जब तक कि पहले से ही यह विशेष संकेत न दिया गया हो कि राष्ट्रगान बजाया जाने वाला है।
- सामूहिक गायन: राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान, सांस्कृतिक अवसरों पर और परेड के अलावा अन्य समारोहों में आधिकारिक संस्करण के साथ सामूहिक गायन किया जाएगा। पर्याप्त आकार के गायक मंडल द्वारा सामूहिक गायन की व्यवस्था की जा सकती है, जिसे संगत बैंड के साथ समन्वय स्थापित करने के लिये उपयुक्त स्थान पर तैनात और प्रशिक्षित किया गया हो।
- विद्यालय: दिशा-निर्देशों में यह उपबंधित है कि सभी विद्यालयों में दिन का कार्य वंदे मातरम के सामूहिक गायन से प्रारंभ किया जा सकता है।
राष्ट्रीय गीत के संबंध में विधिक उपबंध क्या हैं?
भारत के संविधान, 1950 का अनुच्छेद 51क:
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 51क घोषित करता है कि भारतीय नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों में से एक है "संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों और संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करना।"
- तथापि इस उपबंध में स्पष्ट रूप से राष्ट्रगान का नाम लिया गया है, लेकिन इस कर्त्तव्य की भावना वंदे मातरम सहित सभी राष्ट्रीय प्रतीकों तक फैली हुई है, जिसकी राष्ट्रगान के साथ समान स्थिति को संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को पुष्टि की थी।
राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971:
- राष्ट्रगान के वादन एवं सम्मान का विनियमन विधि द्वारा किया गया है, विशेषतः राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971 के अंतर्गत, जिसका उद्देश्य राष्ट्रगान की गरिमा की रक्षा करना है।
- इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन जानबूझकर राष्ट्रगान गाने से रोकना या राष्ट्रगान गाने में लगी किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करना एक दण्डनीय अपराध है।
- फरवरी 2026 के दिशा-निर्देश, यद्यपि राष्ट्रीय गीत के संबंध में कोई नवीन सांविधिक दायित्त्व सृजित नहीं करते, तथापि वंदे मातरम के वादन/गायन के समय सम्मानजनक आचरण को औपचारिक रूप प्रदान कर इस अधिनियम की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
राष्ट्रीय गीत के लिये समर्पित सांविधिक ढाँचे का अभाव :
- भारत के संविधान में "राष्ट्रीय गीत" का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। फिर भी, राष्ट्रीय अवसरों पर इसे सम्मानपूर्वक गाया जाता है और यह उसी देशभक्ति और एकता का प्रतीक है जो इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रेरित की थी।
- परिणामस्वरूप, गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन मुख्यतः संस्थागत अनुशासन एवं नागरिक चेतना पर आधारित है, न कि प्रवर्तनीय विधिक बाध्यता पर; इस प्रकार राष्ट्रीय गीत की स्थिति, राष्ट्रगान की विधिक स्थिति से भिन्न है।
निष्कर्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय के फरवरी 2026 के दिशानिर्देश वंदे मातरम की औपचारिक स्थिति को संहिताबद्ध करने और राज्यों और सरकारी निकायों में इसके पालन में सामंजस्य स्थापित करने का एक व्यवस्थित प्रयास है। जन गण मन और वंदे मातरम दोनों का गहरा सांविधानिक और ऐतिहासिक महत्त्व है - संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी, 1950 को संयुक्त रूप से अंगीकृत किये जाने के कारण ये भारत की एकता, विविधता तथा स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का प्रतीक हैं।। राष्ट्रीय गीतों के क्रम, श्रोताओं के आचरण और प्रदर्शन के लिये उपयुक्त अवसरों को स्थापित करके, सरकार ने राष्ट्रीय गीत के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्त्व को सुदृढ़ किया है।