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होम / संपत्ति अंतरण अधिनियम

व्यवहार विधि

अंतरण करने की क्षमता

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 16-Oct-2023

परिचय

  • संपत्ति अंतरण की शाखा लैटिन मैक्सिम 'एलियनेशन री प्रेफर्टुर ज्यूरी एक्रेसेन्डी (alienation rei prefertur juri accrescendi)' पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि विधिक संचयन हेतु अलगाव का पक्ष लेना।
  • संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 7 उन मानदंडों को रेखांकित करती है, जो संपत्ति अंतरण में शामिल होने के लिये व्यक्तियों की पात्रता निर्धारित करते हैं।

अंतरण करने की क्षमता

  • संविदा अधिनियम, 1872 (ICA) की धारा 11 कहती है, कि प्रत्येक व्यक्ति संविदा करने में सक्षम है:
    • जो उस विधि के अनुसार वयस्क हो, जिसके अधीन वह है।
    • जो स्वास्थ्य चित्त हो,
    • वह किसी भी कानून के तहत संविदा करने की क्षमता रखता हो, जिसके अधीन वह है।

बालिग होने की उम्र

  • वयस्कता अधिनियम, 1875 की धारा 3 के तहत वयस्क व्यक्ति की आयु 18 वर्ष बताई गई है। वयस्कता की आयु उस विधि के अनुसार निर्धारित की गई है, जिसके अधीन कोई व्यक्ति है।
  • मल्लिकार्जुन बनाम मरेप्पा (2008) मामले में, एक व्यक्ति ने अपने अवयस्क बेटे के नाम पर कुछ संपत्ति खरीदी और बाद में इसे बेच दिया, जबकि बेटा अभी भी अवयस्क था।
    • हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 8 के तहत न्यायालय की अनुमति आवश्यक थी लेकिन ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
      • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना कि किसी व्यक्ति के अवयस्क होने का प्रावधान प्रकृति में अनिवार्य है, इसलिये बिक्री को शून्य नहीं माना जा सकता है।

स्वस्थ चित्त

  • ICA की धारा 12 के तहत, एक व्यक्ति संविदा करने के उद्देश्य से स्वस्थ चित्त है, यदि वह संविदा की शर्तों को समझने और अपने हित पर इसके प्रभाव के बारे में तर्कसंगत निर्णय लेने में सक्षम है।
    • विकृत चित्त वाले व्यक्ति द्वारा की गई संविदा व्यर्थ है।
  • एक व्यक्ति जो आमतौर पर विकृत चित्त का है, लेकिन कभी-कभी स्वस्थ चित्त का होता है, इस परिस्थिति में वह संविदा तब कर सकता है, जब वह स्वस्थ चित्त का हो।

संविदाकारी में असक्षम

  • यह आवश्यक है, कि व्यक्ति उस विधि के अनुसार संविदा करने में सक्षम है, जिसके वह अधीन है। यदि कोई व्यक्ति संविदा करने में सक्षम नहीं है, तो वह संपत्ति अंतरित करने के पात्र नहीं होगा।
    • उदाहरण के लिये: विदेशी शत्रु, अपराधी, दिवालिया आदि।

संपत्ति का वैध अंतरण

यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, तो संपत्ति अंतरण वैध माना जाता है:

  • संपत्ति अंतरणीय संपत्ति होनी चाहिये, जिन संपत्तियों को अंतरित नहीं किया जा सकता, उनका उल्लेख संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 6 के तहत इस प्रकार किया गया है:
  • अंतरणकर्त्ता (संपत्ति अंतरित करने वाला) अंतरण के समय व्यक्ति जीवित होना चाहिये और संविदा के लिये सक्षम होना चाहिये।
    • अंतरणकर्त्ता कोई इंसान या कोई न्यायिक व्यक्ति जैसे कंपनी या एसोसिएशन आदि हो सकता है।
  • अंतरण के समय अंतरिती (जिसको संपत्ति अंतरित की गई है) जीवित व्यक्ति होना चाहिये। TPA अंतरित व्यक्ति की सक्षमता के लिये कोई मानदंड निर्धारित नहीं करता है।
    • अंतरित व्यक्ति एक न्यायिक व्यक्ति या इंसान भी हो सकता है।
  • अंतरित की जा रही संपत्ति को अंतरित करने का अधिकार अंतरणकर्त्ता के पास होना चाहिये। उसे संपत्ति अंतरित करने का हकदार होना चाहिये या संपत्ति (अंतरित की जाने वाली) के निपटान के लिये अधिकृत होना चाहिये, यदि वह उसकी अपनी नहीं है।
  • अंतरणकर्त्ता संपत्ति को पूर्ण या आंशिक रूप से और निरपेक्ष या सशर्त रूप से अंतरित कर सकता है।

अवयस्क के पक्ष में अंतरण

  • संविदा के प्रति अक्षम होने के दौरान कोई अवयस्क संपत्ति अंतरित नहीं कर सकता।
  • TPA, 1882 की धारा 7 केवल अंतरणकर्त्ता की योग्यता का प्रावधान करती है न कि अंतरिती की, इसलिये एक अवयस्क अंतरिती के रूप में कार्य कर सकता है।

संपत्ति के निपटान हेतु अधिकृत व्यक्ति

  • कोई भी व्यक्ति जो संपत्ति के निपटान हेतु अधिकृत है, वह अंतरित करने के लिये भी सक्षम है।
    • उदाहरण के लिये, एक हिंदू संयुक्त परिवार का कर्त्ता (Karta of a Hindu Joint family), एक संरक्षक, एक न्यासी, एक निष्पादक या प्रशासक, आदि।
  • एक किरायेदार किराए की संपत्ति को अंतरित नहीं कर सकता क्योंकि वह संपत्ति का मालिक नहीं है।
    • बलाई चंद्र मंडल बनाम इंदुरेखा देवी (1973) मामले में, उच्चतम न्यायालय ने माना कि किराया वसूलने और मकान मालिक की संपत्ति का प्रबंधन करने में किसी व्यक्ति का आचरण उसे मकान मालिक के अभिकर्त्ता के रूप में ज़मीन अंतरित करने का अधिकार प्रदान नहीं करता है।