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आपराधिक कानून

उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिये संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो

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 16-Jan-2024

परिचय:

भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 269 लापरवाहीपूर्ण से संक्रम रोग फैलाकर दूसरों के जीवन को खतरे में डालने के अपराध को दंडित करती है। इसका उद्देश्य प्रसार को रोकने के लिये एक लोक सेवक द्वारा पारित आदेशों का पालन करना है।

IPC की धारा 269:

  • यह धारा ऐसे उपेक्षापूर्ण कृत्यों से संबंधित है जिनसे जीवन के लिये खतरनाक रोग का संक्रम फैलने की संभावना हो
  • इसमें कहा गया है कि जो कोई विधिविरुद्ध या उपेक्षा से ऐसा कोई कार्य करेगा, जिससे कि और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि, जीवन के लिये संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रम फैलना संभाव्य है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या ज़ुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
  • यह एक ज़मानती, संज्ञेय, गैर-शमनीय अपराध है जिसका मुकदमा किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष चलाया जा सकता है।

IPC की धारा 269 की अनिवार्यताएँ:

  • गैरकानूनी/उपेक्षापूर्ण कार्य
  • आपराधिक मनः स्थिति का न होना
  • विश्वास करने का ज्ञान या कारण
  • जैसे संक्रमण फैलाना
  • जीवन के लिये खतरनाक

धारा 269 को लागू करने की परिस्थितियाँ:

  • भारत को स्वच्छ भारत बनाने के उपाय में यह कानून पुलिस द्वारा भी लागू किया जा सकता है।
  • किसी स्थानिक या संक्रामक प्रकृति की महामारी के प्रसार के दौरान मास्क न पहनना
  • खुले में पेशाब करना।
  • सड़क पर कचरा डंप करना।
  • सार्वजनिक स्थान पर थूकना
  • पंजीकरण काउंटरों पर मास्क की अनुपलब्धता
  • मच्छर जनित बीमारी के प्रसार में योगदान।
  • वायु प्रदूषण का कोई नियमन होना
  • सार्वजनिक स्थान पर पानी जमा होने देना।

ऐतिहासिक मामले:

  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने 1 फरवरी, 1974 को रामकृष्ण बाबूराव मस्के बनाम किशन शिवराज शेल्के में कहा था, कि अगर यौन उत्पीड़न से पीड़ित एक वाणिज्यिक यौनकर्मी यौन संबंध के दौरान किसी अन्य संचरण वाले रोग से पीड़ित है, तो वह धारा 269 के तहत सज़ा का उत्तरदायी नहीं है।
  • संजय गोयल बनाम डोंगसन ऑटोमोबाइल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (2016) मामले में, मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि कारखानों से ज़हरीले कचरे को छोड़ने पर IPC की धारा 269 लागू होगी।
  • सिदक सिंह संधू बनाम केन्द्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ (2022) मामले में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सभी परिणामी कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि धारा 269 के तहत आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिये मज़बूत साक्ष्य होने चाहिये।