अमेरिका में मिफेप्रिस्टोन के उपयोग पर निर्णय
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अमेरिका में मिफेप्रिस्टोन के उपयोग पर निर्णय

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 20-Jun-2024

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस  

परिचय:

एक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक सर्वसम्मत निर्णय में गर्भपात विरोधी समूहों की उस याचिका को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा गर्भपात की गोली ‘मिफेप्रिस्टोन’ को दी गई स्वीकृति को रद्द करने की मांग की गई थी, अभी के लिये सामान्यतः प्रयोग की जाने वाली इस दवा तक लोगों की पहुँच को यथावत् रखा गया है। न्यायमूर्ति ब्रेट एम. कावानॉग द्वारा लिखित यह निर्णय विधिक स्थिति के मुद्दे पर केंद्रित था, जिसमें न्यायालय ने कहा कि वादी, जो स्वयं मिफेप्रिस्टोन लेने का परामर्श नहीं देते एवं उसका प्रयोग नहीं करते, उनके पास इस विवाद में FDA की स्वीकृति को चुनौती देने के लिये प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी।

  • रो बनाम वेड मामले में न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक निर्णय दिये जाने के लगभग दो वर्ष बाद, जिसने गर्भपात के संघीय संवैधानिक अधिकार को समाप्त कर दिया था।इस निर्णय ने अभी के लिये मिफेप्रिस्टोन की उपलब्धता को यथावत् रखा है परंतु भविष्य में इस दवा तक पहुँच को सीमित करने के प्रयासों की संभावना के लिये भी स्थान दिया है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय क्या है?

मिफेप्रिस्टोन के लिये FDA की स्वीकृति को चुनौती देने वाले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट  के सर्वसम्मत निर्णय का केंद्र विधिक स्थिति का मुद्दा था। यह निर्णय देकर कि गर्भपात विरोधी वादी के पास मामले में अपेक्षित प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं है, न्यायालय ने अभी के लिये मिफेप्रिस्टोन पर होने वाले मुख्य प्रतिपादन को अनदेखा कर दिया। हालाँकि यह निर्णय न्यायालय द्वारा भविष्य के मामलों की सुनवाई के लिये संभावित खुलेपन का संकेत देता है, जिसमें वाद करने के लिये उचित स्थिति वाले पक्ष शामिल हैं, इस निर्णय से मिफेप्रिस्टोन जैसी गर्भपात की गोलियों का विनियमन एक अनसुलझा विधिक युद्धक्षेत्र बना हुआ है।

चिकित्सीय गर्भपात के लिये मिफेप्रिस्टोन के उपयोग एवं सुरक्षा के संबंध में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • मिफेप्रिस्टोन चिकित्सीय गर्भपात के लिये प्रयुक्त दो-दवाओं वाली दवा का एक घटक है।
  • इस प्रक्रिया में सबसे पहले मिफेप्रिस्टोन लिया जाता है, जिससे गर्भपात प्रारंभ होता है, इसके उपरांत गर्भाशय से भ्रूण को बाहर निकालने के लिये मिसोप्रोस्टोल लिया जाता है।
    • मिफेप्रिस्टोन, प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को अवरुद्ध करके काम करता है, जो गर्भावस्था को बनाए रखने और मासिक धर्म को विनियमित करने के लिये आवश्यक है।
    • मिसोप्रोस्टोल गर्भाशय में संकुचन उत्पन्न करता है, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ नष्ट हो जाता है।
  • FDA ने वर्ष 2000 में गर्भावस्था के 10 सप्ताह तक उपयोग के लिये इस दो-दवा पद्धति को स्वीकृति दी थी।
  • इसकी स्वीकृति के बाद से, अमेरिका में छह मिलियन से अधिक व्यक्तियों ने गर्भपात के लिये मिफेप्रिस्टोन का उपयोग किया है।
    • वर्तमान में अमेरिका में किये जाने वाले लगभग दो-तिहाई गर्भपात में मिफेप्रिस्टोन का प्रयोग किया जाता है।
  • व्यापक शोध ने मिफेप्रिस्टोन की सुरक्षा को प्रदर्शित किया है तथा इसके द्वारा होने वाली गंभीर जटिलताएँ दुर्लभ हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मिफेप्रिस्टोन मामले में गर्भपात विरोधी समूहों के पास आधार की कमी क्यों बताई?

  • केस अवलोकन: कई प्रो-लाइफ मेडिकल एसोसिएशनों और चिकित्सकों ने वर्ष 2022 में FDA पर मिफेप्रिस्टोन, दवा गर्भपात के लिये प्रयोग की जाने वाली दवा की स्वीकृति एवं वितरण की शर्तों को लेकर वाद दायर किया।
  • वादी के दावे: वादी ने तर्क दिया कि मिफेप्रिस्टोन असुरक्षित है और उन्होंने FDA की अनुमोदन प्रक्रिया को चुनौती दी, विशेष रूप से मेल तथा टेलीमेडिसिन के माध्यम से विस्तारित वितरण पर आपत्ति जताई।
  • निचली अदालत का निर्णय (अप्रैल 2023): संघीय न्यायाधीश मैथ्यू जे. कास्मैरिक ने मिफेप्रिस्टोन के लिये FDA की स्वीकृति को निलंबित कर दिया तथा इसे प्रभावी रूप से बाज़ार से हटा दिया।
  • अपील न्यायालय का निर्णय: न्यू ऑरलियन्स के एक न्यायालय ने निचली न्यायालय के निर्णय को आंशिक रूप से पलट दिया, जिसके अंतर्गत मिफेप्रिस्टोन को स्वीकृत करने की अनुमति दी गई, परंतु डाक वितरण और टेलीमेडिसिन परामर्श पर रोक लगाने सहित कुछ प्रतिबंध लगा दिये गए।
  • सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी: सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय न्यायालय के निर्णय पर रोक लगा दी तथा मामले की सुनवाई के लिये सहमति व्यक्त की।
    • न्यायमूर्ति कावानॉग की राय में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि वादीगण के पास संविधान के अनुच्छेद III के अंतर्गत केवल दूसरे व्यक्तियों की मिफेप्रिस्टोन तक पहुँच को प्रतिबंधित करने की इच्छा के आधार पर वाद करने का अधिकार नहीं है।
    • FDA विनियम और परिवर्तन: वर्ष 2016 और 2021 में FDA की कार्यवाहियों ने मिफेप्रिस्टोन तक पहुँच का विस्तार किया, जिससे गर्भावस्था के 10 सप्ताह तक दवा गर्भपात की अनुमति मिली और प्रारंभ में व्यक्तिगत चिकित्सक की जाँच के बिना मेल डिलीवरी की अनुमति मिली।
  • व्यापक निहितार्थ: वादी के पक्ष में निर्णय, औषधि सुरक्षा और उपलब्धता पर FDA के नियामक अधिकार को क्षीण कर सकता है।
    • यह मामला गर्भपात के अधिकारों पर व्यापक राजनीतिक और विधिक संघर्ष को दर्शाता है, जिसका प्रभाव राज्य विधियों तथा संघीय विधान पर भी पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की गोली मिफेप्रिस्टोन को FDA द्वारा स्वीकृति देने की चुनौती को क्यों अस्वीकार कर दिया?

  • याचिका अस्वीकार करने के लिये सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
    • वादी (गर्भपात विरोधी समूह एवं चिकित्सक) "व्यक्तिगत भागीदारी की आवश्यकता" को पूरा करने में विफल रहे और मिफेप्रिस्टोन पर FDA की कार्रवाइयों से हुई वास्तविक क्षति को दिखाने में विफल रहे। चूँकि उन्होंने गोली को निर्धारित करने या लेने में सीधे तौर पर शामिल पक्षों को इस वाद में शामिल नहीं किया, अतः वे इसकी उपलब्धता से होने वाली किसी भी हानि को प्रदर्शित नहीं कर सके।
    • अपने वर्ष 1982 के निर्णय का उदाहरण देते हुए, न्यायालय ने कहा कि वाद चलाने के लिये, वादी को यह दिखाना होगा कि उन्हें कोई विशिष्ट एवं प्रत्यक्ष क्षति हुई है या उन्हें इसका खतरा है तथा कथित क्षति और प्रतिवादी (FDA) की चुनौती दी गई कार्यवाही के बीच एक कारण संबंध होना चाहिये।
    • न्यायालय ने कहा कि संघीय न्यायालय, नागरिकों के लिये सरकार के कामकाज के तरीके के विषय में सामान्य शिकायतें करने के लिये खुला मंच नहीं है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मिफेप्रिस्टोन के लिये FDA की स्वीकृति एवं विनियमन को चुनौती देने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया और कहा कि गर्भपात विरोधी वादी के पास वाद चलाने के लिये विधिक आधार नहीं है, क्योंकि वे FDA की कार्यवाही से हुई किसी विशिष्ट क्षति को सिद्ध करने में असफल रहे।

निष्कर्ष:

मिफेप्रिस्टोन के लिये FDA की स्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिका को अस्वीकार करने वाले सुप्रीम कोर्ट के सर्वसम्मत निर्णय ने व्यापक रूप से प्रयोग की जाने वाली गर्भपात की गोली तक पहुँच को कम-से-कम अभी के लिये यथावत् रखा है। हालाँकि इस निर्णय ने दवा की उपलब्धता को प्रतिबंधित करने के भविष्य के प्रयासों की संभावना के लिये भी स्थान दिया है, जो रो बनाम वेड परिदृश्य के उपरांत गर्भपात के अधिकारों को लेकर चल रही विधिक लड़ाई को दर्शाता है। चूँकि राज्य अलग-अलग गर्भपात विधियों को लागू करते हैं, अतः यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि प्रजनन अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस में मिफेप्रिस्टोन जैसी दवाओं का विनियमन कैसे विवाद का एक महत्त्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है।